7 Aug 2026, Fri

आर प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, एक राउंड रहते ही बने सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज चैंपियन

नई दिल्ली: भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज शतरंज टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपने करियर की पहली ग्रैंड चेस टूर (GCT) ट्रॉफी अपने नाम की। पूरे टूर्नामेंट में लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहने वाले प्रज्ञानानंदा ने कुल 23.5 अंक हासिल किए, जो सभी खिलाड़ियों में सबसे अधिक रहे।

प्रज्ञानानंदा की यह जीत भारतीय शतरंज के लिए एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उन्होंने टूर्नामेंट के अंतिम दौर से पहले ही खिताब अपने नाम कर लिया था। ब्लिट्ज राउंड के दूसरे अंतिम मुकाबले में उन्होंने उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव के साथ ड्रॉ खेला, जिसके बाद उनकी बढ़त इतनी मजबूत हो गई कि आखिरी मैच के परिणाम का खिताब पर कोई असर नहीं पड़ा।

पूरे टूर्नामेंट में बनाए रखा दबदबा

पांच दिनों तक चले इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा ने शुरुआत से ही शानदार लय बनाए रखी। रैपिड और ब्लिट्ज दोनों प्रारूपों में उन्होंने लगातार अंक जुटाए और अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाए रखी।

ब्लिट्ज राउंड के अंतिम नौ मुकाबलों में उन्होंने तीन जीत दर्ज कीं, पांच मैच ड्रॉ खेले और केवल एक मैच गंवाया। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने न केवल मुख्य ट्रॉफी जीती, बल्कि दोनों प्रारूपों में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले खिलाड़ी भी बने।

खिताब जीतने के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि स्कोरबोर्ड देखकर यह जीत आसान लग सकती है, लेकिन वास्तव में ऐसा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने माना कि सिंदारोव ने आखिरी दिन तक उन्हें कड़ी चुनौती दी और मुकाबला काफी कठिन रहा।

मिली 48 लाख रुपये की इनामी राशि

इस शानदार जीत के साथ प्रज्ञानानंदा को 50 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 48 लाख रुपये) की इनामी राशि मिली। इसके अलावा उन्हें 13 महत्वपूर्ण ग्रैंड चेस टूर अंक भी प्राप्त हुए, जो सीजन के फाइनल में पहुंचने की उनकी संभावनाओं को मजबूत करते हैं।

शानदार फॉर्म में हैं भारतीय ग्रैंडमास्टर

प्रज्ञानानंदा इस समय अपने करियर की बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं। इससे पहले जून 2026 में उन्होंने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का खिताब जीतकर भी इतिहास रचा था। उस टूर्नामेंट के अंतिम दौर में उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराया था और लगातार चार जीत के साथ ट्रॉफी अपने नाम की थी।

अब उनकी नजरें सिंकफील्ड कप पर हैं, जो 10 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। यह ग्रैंड चेस टूर के फाइनल में पहुंचने का आखिरी मौका होगा। पॉइंट्स टेबल में शीर्ष चार खिलाड़ियों को फाइनल में जगह मिलेगी, जहां विजेता को 2 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 1.65 करोड़ रुपये) की इनामी राशि मिलेगी।

भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर

तमिलनाडु के चेन्नई में 10 अगस्त 2005 को जन्मे आर प्रज्ञानानंदा ने कम उम्र में ही शतरंज की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली थी। वर्ष 2018 में महज 12 साल, 10 महीने और 13 दिन की उम्र में वह भारत के सबसे युवा और दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने थे।

उनकी सफलता के पीछे परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उनकी बड़ी बहन आर वैशाली भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की ग्रैंडमास्टर हैं और भारतीय शतरंज की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं।

प्रज्ञानानंदा की यह ऐतिहासिक जीत न केवल उनके करियर का बड़ा मुकाम है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारतीय शतरंज का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *