संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराव की स्थिति देखने को मिली। लोकसभा और राज्यसभा में नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि से जुड़े आरोपों को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इसी राजनीतिक घमासान के बीच भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने विपक्ष के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकार पर इस तरह दबाव बनाना उचित नहीं है। कंगना ने कहा कि जनता ने जिस सरकार को बहुमत देकर चुना है, उसे यह अधिकार है कि वह अपने मंत्रिमंडल और प्रशासनिक फैसलों को स्वयं तय करे। विपक्ष किसी मंत्री को हटाने या सरकार को झुकाने के लिए आंदोलन और दबाव की राजनीति नहीं कर सकता।
कंगना रनौत ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्ष को सरकार चलाने की इतनी ही इच्छा है, तो उसे चुनाव जीतकर सत्ता में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और सरकार को ब्लैकमेल करने की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनके इस बयान को विपक्ष के लगातार जारी विरोध-प्रदर्शनों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, विपक्ष नीट परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसके अलावा राम मंदिर दान मामले में भी निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे इन दोनों मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा चाहते हैं।
कंगना रनौत ने कहा कि संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और समाधान निकालने का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है। उनका मानना है कि विपक्ष को अपने सवाल सदन के भीतर उठाने चाहिए, न कि लगातार हंगामा कर संसद की कार्यवाही बाधित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष भी चाहता है कि संसद सुचारू रूप से चले और सभी मुद्दों पर खुलकर बहस हो, लेकिन शोर-शराबा और व्यवधान से न तो जनता का हित होता है और न ही लोकतंत्र मजबूत होता है।
सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले अध्यक्ष ओम बिरला ने छह पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। बार-बार अपील के बावजूद जब हंगामा नहीं रुका तो कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इसी तरह राज्यसभा में भी विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की।
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा प्रस्तावित है। हालांकि पहले ही दिन जिस तरह का गतिरोध देखने को मिला, उससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। वहीं कंगना रनौत का बयान इस बहस को और अधिक राजनीतिक रंग दे सकता है।

