नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के नाम, तस्वीर और पहचान के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इंटरनेट पर मौजूद जाह्नवी कपूर से संबंधित अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने उनके फैन पेजों और गैर-व्यावसायिक कंटेंट को ब्लॉक करने या हटाने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि किसी सार्वजनिक हस्ती के व्यक्तिगत अधिकारों का विस्तार इस हद तक नहीं किया जा सकता कि उससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो।
यह मामला जाह्नवी कपूर द्वारा दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपने पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की थी। अभिनेत्री ने आरोप लगाया था कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और हजारों वेबपेजों पर उनकी तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल बिना अनुमति व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने स्पष्ट किया कि अश्लील और अपमानजनक सामग्री से सुरक्षा पाने का अधिकार अभिनेत्री को है। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता उन वेबपेजों की स्पष्ट सूची पेश करें, जिन पर वास्तव में अश्लील या अत्यंत आपत्तिजनक सामग्री मौजूद है। कोर्ट ने कहा कि राहत केवल ऐसे कंटेंट तक सीमित रहेगी।
सुनवाई के दौरान जाह्नवी कपूर की ओर से 5000 से अधिक वेबपेजों और पोस्टों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। लेकिन अदालत ने कहा कि सभी फैन पेजों या बिना अनुमति बनाए गए कंटेंट को एक साथ हटाने का आदेश देना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर फैन पेजों की प्रकृति अलग-अलग हो सकती है। कुछ पेज किसी कलाकार के काम की सराहना करते हैं, कुछ आलोचना करते हैं और कुछ व्यंग्य भी करते हैं। यह सब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आ सकता है।
जस्टिस भंभानी ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम देश के नैतिक रक्षक नहीं हैं। समस्या से निपटने का यह तरीका खुद समस्या से भी ज्यादा खराब हो सकता है।” उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक हस्ती को यह स्वीकार करना होगा कि डिजिटल दुनिया में उसके बारे में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की बातें होंगी।
अदालत ने यह भी पूछा कि कोई सेलिब्रिटी अपने नाम का उपयोग करने वाले हर फैन क्लब या अनधिकृत पेज को कैसे बंद करा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन का हिस्सा होने के कारण कलाकारों को प्रशंसा, आलोचना और व्यंग्य—तीनों का सामना करना पड़ता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कॉपीराइट और पर्सनालिटी राइट्स के बीच के अंतर पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान का व्यावसायिक शोषण और सामान्य सार्वजनिक चर्चा या फैन गतिविधि को एक समान नहीं माना जा सकता।
यह फैसला डिजिटल अधिकारों और सेलिब्रिटी पर्सनालिटी राइट्स के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने एक ओर अभिनेत्री की गरिमा और निजता की रक्षा के लिए अश्लील सामग्री हटाने का आदेश दिया, वहीं दूसरी ओर इंटरनेट पर वैध अभिव्यक्ति और फैन संस्कृति को भी संरक्षण दिया।
फिलहाल अदालत ने याचिकाकर्ता को आपत्तिजनक वेबपेजों की विस्तृत सूची दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि किन डिजिटल प्लेटफॉर्म और लिंक पर आगे कार्रवाई की जानी चाहिए।

