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US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हमले किए। इन हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ हमलों में मदद करने वाले देशों को भी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, ताजा सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और उनके चालक दल को निशाना बना सकता है। अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन उपकरणों के साथ छोटी सैन्य नौकाओं को निशाना बनाया।
अमेरिका की यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद सामने आई। अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को जिम्मेदार ठहराया है। जहाज पर हमले के बाद आग लग गई थी और चालक दल का एक सदस्य लापता बताया गया। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए गए।
अमेरिकी सेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। CENTCOM ने दावा किया कि ईरान का इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण नहीं है और अमेरिका कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि यह इलाका उसकी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को गैरकानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि वॉशिंगटन क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि जिस देश की जमीन, सैन्य अड्डों या अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जाएगा, उसे हमले का स्रोत माना जा सकता है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका को इन सैन्य कार्रवाइयों के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग भी की है।
अमेरिकी हमलों के बाद खाड़ी देशों में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। बहरीन में सोमवार को दो बार मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। कुवैत ने भी अपनी ओर आने वाले कथित रॉकेट और ड्रोन हमलों को रोकने की जानकारी दी। वहीं जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने चार ईरानी मिसाइलों को मार गिराया और इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के कई इलाकों में धमाकों की पुष्टि की है। शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत की बात कही गई, हालांकि नुकसान और हताहतों की पूरी जानकारी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक जारी सैन्य तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति, माल ढुलाई और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों की ओर से जारी हमलों और जवाबी धमकियों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।

