संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को लेकर एक अहम प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव में ऐसे विश्व मानचित्र के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिसमें अलग-अलग महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देता है। खास तौर पर अफ्रीका के वास्तविक आकार को सही तरीके से दिखाने पर जोर दिया गया है। टोगो की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को महासभा में 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने अकेले इसके खिलाफ मतदान किया। कुछ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने की अपील
प्रस्ताव में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों को ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन वाले मानचित्र के इस्तेमाल पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इस प्रोजेक्शन का उद्देश्य पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों के क्षेत्रफल को अपेक्षाकृत सही अनुपात में प्रदर्शित करना है।
दुनिया में लंबे समय से जिस पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता रहा है, उसमें ध्रुवों के नजदीक स्थित क्षेत्र अपने वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि लंबे समय से भूगोल विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों की ओर से वैकल्पिक मानचित्र प्रोजेक्शन के इस्तेमाल की मांग उठती रही है।
अफ्रीका और ग्रीनलैंड के आकार में बड़ा अंतर
पारंपरिक मर्केटर मानचित्र में अफ्रीका और ग्रीनलैंड को देखने पर दोनों के आकार में बहुत ज्यादा अंतर नजर नहीं आता। हालांकि, वास्तविक क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन में यह अंतर ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है।
समर्थकों का कहना है कि नक्शे सिर्फ भौगोलिक जानकारी दिखाने का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे लोगों की दुनिया को समझने की धारणा को भी प्रभावित करते हैं। किसी क्षेत्र को वास्तविकता से बहुत बड़ा या छोटा दिखाने से उसके आकार और महत्व को लेकर लोगों की समझ पर असर पड़ सकता है।
टोगो ने पेश किया प्रस्ताव
इस प्रस्ताव को टोगो की ओर से आगे बढ़ाया गया और इसे अफ्रीकी देशों के साथ-साथ कई अन्य देशों का भी समर्थन मिला। प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि दुनिया के मानचित्रों में महाद्वीपों के आकार को अधिक संतुलित और वास्तविक तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी है।
मतदान के दौरान 164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। अमेरिका ने इसका विरोध किया। वहीं सर्बिया, एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
नक्शे को लेकर क्यों उठी बहस?
मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल 16वीं सदी से होता आया है और इसका निर्माण मुख्य रूप से समुद्री नौवहन को आसान बनाने के उद्देश्य से किया गया था। इसमें दिशा और कोणों को बनाए रखना उपयोगी रहा, लेकिन इसका एक असर यह भी है कि ध्रुवों की ओर बढ़ने वाले क्षेत्र बड़े दिखाई देते हैं।
‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन इस समस्या को कम करने की कोशिश करता है। इसमें महाद्वीपों के क्षेत्रफल को उनके वास्तविक अनुपात के करीब रखने पर ध्यान दिया जाता है। हालांकि, पृथ्वी गोलाकार होने के कारण किसी भी सपाट विश्व मानचित्र में आकार, दूरी या दिशा में कुछ न कुछ विकृति होना स्वाभाविक है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव दुनिया के नक्शे को लेकर जारी बहस में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि यह पारंपरिक मानचित्र को तत्काल बदलने का आदेश नहीं है, लेकिन इससे वास्तविक क्षेत्रफल को दर्शाने वाले मानचित्रों के इस्तेमाल को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ सकती है।

