तेहरान: पश्चिम एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच ईरान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने और अपनी सुरक्षा के लिए विदेशी शक्तियों पर निर्भरता कम करने की अपील की है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में एक नए त्रिपक्षीय संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुस्लिम देशों को अपनी सामूहिक शक्ति पर भरोसा करना चाहिए और सुरक्षा के लिए बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम देश आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना के साथ आगे बढ़ें, तो वे किसी भी बाहरी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सकते हैं।
‘ईरान की सैन्य क्षमता दुनिया के सामने आई’
ईरानी विदेश मंत्री ने अपनी पोस्ट में ईरान की सशस्त्र सेनाओं की तैयारियों और क्षमता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ईरान ने दुनिया की सबसे महंगी सैन्य शक्तियों के सामने अपनी रक्षा क्षमता और रणनीतिक तैयारी का प्रदर्शन किया है। उनके अनुसार, आत्मनिर्भर सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोग ही लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।
अरागची ने कहा, “जब मुस्लिम देश एक साथ खड़े होते हैं, तो बाहरी दुर्भावनापूर्ण ताकतों की ओर से आने वाली हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। अब समय आ गया है कि हम केवल अपनी क्षमताओं पर भरोसा करें और वास्तविक भाईचारे की भावना को मजबूत करें।”
क्या है मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट?
हाल ही में मक्का में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक के दौरान इस संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाना, सामूहिक सुरक्षा क्षमता को मजबूत करना और संभावित बाहरी खतरों के खिलाफ समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना बताया गया है।
संयुक्त बयान के अनुसार, यह समझौता तीनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास है। इसमें यह भी कहा गया कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और सुरक्षा सहयोग के तहत आवश्यक समन्वय किया जाएगा।
क्षेत्रीय राजनीति पर बढ़ी चर्चा
मक्का समझौते के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को प्रभावित कर सकता है। हालांकि सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि यह किसी सैन्य गुट या धार्मिक गठबंधन की शुरुआत नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और आपसी सहयोग को बढ़ाना है।
ईरान की प्रतिक्रिया को भी इसी व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेहरान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि मुस्लिम देशों की सुरक्षा का स्थायी समाधान बाहरी शक्तियों पर निर्भरता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था में निहित है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, बदलते रणनीतिक गठबंधनों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच ईरान और मक्का समझौते से जुड़े देशों के बयानों ने आने वाले समय में क्षेत्रीय कूटनीति और रक्षा सहयोग की दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

