बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में अपनी राय रखते हुए कहा है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना और प्रधानमंत्री से सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है। हालांकि, विरोध के नाम पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना सही नहीं है। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अभिनेता ने प्रदर्शनकारियों से अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने की अपील की है।
अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और आलोचना के लिए जगह होनी चाहिए, लेकिन विरोध का तरीका भी मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी राय रखने के कारण अगर कुछ लोग उन्हें किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थक कहते हैं, तो इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उनके मुताबिक, अपनी बात रखना और अपने विचारों पर कायम रहना जरूरी है।
सरकार का समर्थन करने वालों की राय का भी हो सम्मान
अनुपम खेर ने कहा कि लोकतंत्र में केवल विरोध करने वालों की आवाज ही नहीं, बल्कि सरकार का समर्थन करने वाले नागरिकों के विचारों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को सरकार की नीतियों से असहमति है, तो उसे अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। इसी तरह, सरकार के कामकाज से सहमत लोगों को भी अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
अभिनेता के मुताबिक, किसी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और उसके फैसलों की आलोचना करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन विचारों में मतभेद होने का मतलब यह नहीं है कि किसी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि दूसरों को खुश करने या लोकप्रिय बने रहने के बजाय व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपनी राय रखनी चाहिए।
प्रधानमंत्री और उनकी मां पर टिप्पणी को लेकर जताई नाराजगी
अनुपम खेर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिसकर्मियों, खासकर महिला पुलिस अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके दौरान किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
अभिनेता ने प्रधानमंत्री की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर किए जाने वाले तंज पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का साधारण परिवार से होना या जीवन में पहले कोई छोटा काम करना अपमान की बात नहीं है। अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें अपने पिता पर गर्व है, जिन्होंने वन विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया था।
वोट चोरी के आरोपों पर सबूत पेश करने की अपील
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के संदर्भ में अभिनेता ने कहा कि यदि किसी को चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता का संदेह है, तो उसे अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण सामने रखने चाहिए।
उन्होंने कानूनी और संवैधानिक तरीकों से शिकायत करने, जवाब मांगने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, किसी भी आरोप को केवल बयान देने से सच नहीं माना जा सकता। उसकी जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर जताया भरोसा
अनुपम खेर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अपना भरोसा भी जाहिर किया। उन्होंने कहा कि देश में सरकार के कामकाज को लेकर अलग-अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री का समर्थन करने वाले लोगों की भावनाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
अभिनेता के बयान ने एक बार फिर लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक असहमति और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा को लेकर बहस को चर्चा में ला दिया है।

