श्रीनगर: भारत के बुनियादी ढांचा विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल Zojila Tunnel ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही इस सुरंग के 13.153 किलोमीटर लंबे मुख्य हिस्से का सफलतापूर्वक ब्रेकथ्रू पूरा हो गया है। इसके साथ ही सुरंग के दोनों छोर आपस में जुड़ गए हैं, जो भारतीय इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमता का एक शानदार उदाहरण माना जा रहा है।
जोजिला टनल को दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब, द्विदिशीय (दोनों दिशाओं में यातायात वाली) सुरंग माना जा रहा है, जो इतनी अधिक ऊंचाई पर निर्मित की जा रही है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। लंबे समय से इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों और यात्रियों को मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है, लेकिन इस सुरंग के पूरा होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी।
वर्तमान में कश्मीर के सोनमर्ग क्षेत्र से द्रास, कारगिल और लद्दाख जाने के लिए यात्रियों को जोजिला दर्रे से होकर गुजरना पड़ता है। यह मार्ग देश के सबसे कठिन और खतरनाक पहाड़ी रास्तों में गिना जाता है। तीखे मोड़, भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और खराब मौसम अक्सर इस मार्ग को जोखिमपूर्ण बना देते हैं। कई बार मौसम खराब होने पर सड़क पूरी तरह बंद करनी पड़ती है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जोजिला टनल के चालू होने के बाद यह स्थिति काफी हद तक बदल जाएगी। वर्तमान में जिस दूरी को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, वही सफर मात्र 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह सुरंग जम्मू-कश्मीर के बालटाल (सोनमर्ग) और लद्दाख के मनिमार्ग (द्रास) को सीधे जोड़ने का काम करेगी, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ लद्दाख क्षेत्र के निवासियों को मिलने वाला है। हर वर्ष सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है। इसके चलते लद्दाख का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से लगभग पांच से छह महीने तक कट जाता है। इस दौरान आवश्यक वस्तुओं, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होती है। लेकिन सुरंग के निर्माण के बाद साल के सभी 12 महीनों में सड़क संपर्क बना रहेगा, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
जोजिला टनल का सामरिक महत्व भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लद्दाख क्षेत्र चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के करीब स्थित है, इसलिए यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अहम है। सुरंग के माध्यम से भारतीय सेना को हर मौसम में तेज और सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिलेगी। सैनिकों, सैन्य वाहनों, टैंकों और अन्य रक्षा उपकरणों को सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि कश्मीर और लद्दाख के आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक विकास का नया द्वार है। पर्यटन, व्यापार, परिवहन और स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी इससे उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
जोजिला टनल का सफल ब्रेकथ्रू भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, आधुनिक तकनीक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बड़े सपनों को साकार करने की क्षमता का प्रतीक बन गया है। आने वाले समय में यह परियोजना देश के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल होगी।

