Nitin Gadkari एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। Nagpur में आयोजित दो दिवसीय जल क्रांति परिषद कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने राजनीति और विकास कार्यों को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। गडकरी ने कहा कि राजनीति का मौजूदा नियम बन गया है कि “एक रुपये का काम करो और 10 रुपये की पब्लिसिटी करो”, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इसके उलट काम किया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन को देश के ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि यदि गांवों में पानी को सही तरीके से रोका और बचाया जाए, तो किसानों और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में और घर का पानी घर में रोकना जरूरी है।”
गडकरी ने कहा कि बारिश का पानी ही सबसे बड़ा प्राकृतिक संसाधन है और इसी का सही उपयोग भविष्य को सुरक्षित बना सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पानी को केवल बहने देने के बजाय उसे जमीन में रिसने दिया जाए ताकि भूजल स्तर बढ़ सके। उनके मुताबिक, पानी को रोकना, जमा करना और संरक्षित करना ही गांवों की समृद्धि की असली कुंजी है।
अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने राजनीति के प्रचार तंत्र पर भी खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनके कई मित्र उन्हें सलाह देते हैं कि जो काम किए जा रहे हैं, उनकी जानकारी जनता तक पहुंचनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “राजनीति का नियम है कि एक रुपये का काम करो और 10 रुपये की पब्लिसिटी करो। लेकिन हमने 10 रुपये का काम किया और एक रुपये की भी पब्लिसिटी नहीं की। यह हमारी कमी रही।”
गडकरी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग इसे राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा कटाक्ष मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे उनकी सादगी और कामकाज की शैली से जोड़कर देख रहे हैं। अपने साफ और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले गडकरी पहले भी कई बार राजनीतिक कार्यशैली और सरकारी तंत्र को लेकर खुलकर बोल चुके हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में यह भी कहा कि “पानी ही जीवन है” और यही गांव, गरीब, मजदूर और किसान की जिंदगी बदल सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था “पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था” पिछले 25 वर्षों से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। संस्था का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में जल संकट को कम करना और खेती को मजबूत बनाना है।
गडकरी ने कहा कि अगर देश में जल प्रबंधन को गंभीरता से लागू किया जाए, तो सूखा और पानी की कमी जैसी समस्याओं पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
फिलहाल, गडकरी का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे मौजूदा राजनीति की सच्चाई बताने वाला बयान मान रहे हैं, तो कई इसे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी बता रहे हैं।

