पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं, जहां Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच लगभग 21 घंटे तक चली उच्चस्तरीय वार्ता बेनतीजा रहने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इस विफल कूटनीतिक प्रयास के तुरंत बाद अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया।
अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command (CENTCOM) के अनुसार यह नाकेबंदी सोमवार सुबह 10 बजे (ET) से लागू की जाएगी। यह निर्णय अमेरिकी नेतृत्व, खासकर Donald Trump के निर्देश पर लिया गया है। इस कदम को ईरान पर दबाव बढ़ाने और क्षेत्र में उसकी गतिविधियों को सीमित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी तुरंत दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 8% बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरे की आशंका के चलते आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
इसी बीच Lebanon और Israel के बीच संघर्ष भी तेज हो गया है। ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने दावा किया है कि उसने रविवार को इजरायली ठिकानों पर 43 सैन्य हमले किए। इन हमलों में सीमा के पास के क्षेत्रों के साथ-साथ इजरायल के अंदरूनी इलाकों को भी निशाना बनाया गया।
इसके जवाब में इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक नबातीह शहर और मेफदौन कस्बे सहित कई इलाकों को निशाना बनाया गया। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हिज़्बुल्लाह का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है। कई देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की अपील की है। Anthony Albanese, जो Australia के प्रधानमंत्री हैं, ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए खुला रखने की मांग की है और कहा है कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा। फिलहाल दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं, जहां हर नया घटनाक्रम वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

