11 Mar 2026, Wed

US–ईरान युद्ध के कारण संकट में आए फलों-सब्जियों के निर्यातकों को दी गई राहत, ये शुल्क हो गया माफ

खाड़ी संकट का असर: फलों-सब्जियों के निर्यात पर संकट, JNPA ने कंटेनर चार्जेस में बड़ी राहत दी 🍇🚢

अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत के निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत से फल और सब्जियों के निर्यात में बड़ी रुकावट आ गई है। कई बंदरगाहों पर सैकड़ों रीफर (शीतगृह) कंटेनर फंस गए हैं, जिनमें केला, अंगूर, प्याज और तरबूज जैसे नाशवान उत्पाद भरे हुए हैं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए Jawaharlal Nehru Port Authority (JNPA) ने निर्यातकों को राहत देने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री Jaykumar Rawal ने बताया कि बंदरगाह प्राधिकरण ने फंसे हुए कंटेनरों पर लगने वाले कई शुल्कों में बड़ी छूट देने का निर्णय लिया है, जिससे निर्यातकों और किसानों को भारी वित्तीय नुकसान से बचाया जा सकेगा।

युद्ध के कारण शिपिंग रूट प्रभावित

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने इस क्षेत्र की सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं। इसका सीधा असर Strait of Hormuz और Suez Canal से गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों पर पड़ा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार Maersk, MSC Mediterranean Shipping Company और CMA CGM जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने मिडिल ईस्ट रूट पर अपनी सेवाएं फिलहाल स्थगित कर दी हैं। इससे कंटेनर जहाजों की उपलब्धता कम हो गई है और निर्यात का माल बंदरगाहों पर अटक गया है।

JNPA ने दी बड़ी राहत

इस संकट के बीच Jawaharlal Nehru Port Authority ने निर्यातकों के लिए कई राहत उपाय घोषित किए हैं।

मुख्य राहत उपाय:

  • ग्राउंड रेंट, स्टोरेज और ड्वेल टाइम चार्जेस पर 100% माफी

  • रीफर कंटेनरों के प्लग-इन या बिजली कनेक्शन चार्जेस में 80% छूट

  • बंदरगाह पर प्रभावित कंटेनरों के लिए अतिरिक्त स्टोरेज और स्टैकिंग स्पेस की व्यवस्था

इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यातकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े और कंटेनरों में मौजूद नाशवान सामान सुरक्षित रह सके।

राहत की अवधि और पात्रता

यह विशेष छूट 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि से 14 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक, यानी कुल 15 दिनों के लिए लागू की गई है।

यह राहत उन कंटेनरों पर लागू होगी:

  • जो 28 फरवरी 2026 से टर्मिनल में मौजूद हैं

  • या जो 8 मार्च 2026 सुबह 7 बजे तक गेट-इन हुए हैं

देशभर में फंसे हैं सैकड़ों कंटेनर

मौजूदा स्थिति के अनुसार Jawaharlal Nehru Port पर करीब 250 से 1000 के बीच फल-सब्जियों से भरे कंटेनर फंसे हुए बताए जा रहे हैं। वहीं Mundra Port (गुजरात) पर भी करीब 150 कंटेनर अटके हुए हैं।

कुल मिलाकर देशभर में लगभग 1000 कंटेनर इस संकट से प्रभावित हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से केला, अंगूर, प्याज और अन्य ताजे कृषि उत्पाद शामिल हैं, जो जल्दी खराब होने वाले होते हैं।

किसानों और निर्यातकों को बड़ी राहत

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम किसानों और निर्यातकों के लिए बेहद अहम है। यदि बंदरगाहों पर कंटेनर लंबे समय तक खड़े रहते, तो नाशवान सामान खराब होने का खतरा बढ़ जाता और किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता था।

सरकार और बंदरगाह प्राधिकरण ने टर्मिनल ऑपरेटर्स को निर्देश दिया है कि प्रभावित कंटेनरों को प्राथमिकता दी जाए और राहत योजनाओं को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही वैकल्पिक समुद्री मार्गों, जैसे केप ऑफ गुड होप, के जरिए जहाजों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट समुदाय और कृषि निर्यात क्षेत्र को बड़ी राहत देगा।

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