12 Mar 2026, Thu

UPSC AIR-113 पर दो दावेदारी का रार हुआ खत्म, बुलंदशहर की शिखा ने मानी गलती, जानिए क्या कहा

UPSC AIR-113 विवाद: बुलंदशहर और दिल्ली की दो शिखाओं के बीच गहमागहमी

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 के परिणाम घोषित होने के बाद लगातार विवाद की खबरें सामने रही हैं। पहले AIR-301 विवाद सुर्खियों में रहा, अब AIR-113 को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है।

बुलंदशहर की शिखा के बाद अब दिल्ली की एक अन्य शिखा ने भी 113वीं रैंक का दावा किया है। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर बहस और गहमागहमी तेज हो गई।

बुलंदशहर की शिखा का बयान

बुलंदशहर की शिखा ने मीडिया से कहा कि जिस शिखा का चयन हुआ है, वह वास्तव में दिल्ली की शिखा हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों का नाम एक जैसा होने के कारण उन्होंने केवल PDF में नाम देखा था और रोल नंबर की जांच नहीं की। उन्होंने इसे अपनी गलती माना।

इस विवाद के कारण बुलंदशहर में खुशी का माहौल पहले बन गया था। परिणाम घोषित होने के बाद यह खबर फैल गई थी कि एक चपरासी की बेटी, शिखा, ने ऑल इंडिया रैंक 113 हासिल की है। परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग इस उपलब्धि को बड़े गौरव की बात मानकर जश्न मना रहे थे।

दिल्ली की शिखा का दावा

दिल्ली की शिखा ने अपने इंटरव्यू कॉल लेटर और रोल नंबर से जुड़े दस्तावेज सोशल मीडिया पर साझा किए हैं, जिससे साबित होता है कि उन्होंने सच में AIR-113 प्राप्त की है। वर्तमान में वह हरियाणा में BDO (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) के पद पर तैनात हैं।

सोशल मीडिया पर यह विवाद बढ़ने के साथ ही दोनों शिखाओं के नाम और रोल नंबर के दस्तावेज वायरल हो गए हैं। लोग इस घटना को UPSC परीक्षाओं में नामों की समानता और संभावित भ्रम का उदाहरण बता रहे हैं।

UPSC परीक्षा में पिछले विवाद

ये विवाद पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले AIR-301 पर भी दो कैंडिडेट्स ने दावा पेश किया था। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने रैंक 301 (रोल नंबर 0856794) हासिल की थी। उस समय भी सोशल मीडिया पर बहस चल रही थी कि कौन वास्तविक चयनित उम्मीदवार है।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि UPSC जैसी परीक्षा में कभी-कभी नामों की समानता और रोल नंबर की गलती से भ्रम पैदा हो सकता है। उम्मीदवारों और उनके परिवारों को हमेशा रोल नंबर और दस्तावेज़ की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।

सोशल मीडिया की भूमिका

सोशल मीडिया पर ऐसे विवाद तेजी से फैलते हैं। लोग अपने अनुभव और दस्तावेज साझा करते हैं, जिससे कई बार सही जानकारी और अफवाह में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। इस AIR-113 विवाद ने एक बार फिर दिखाया कि परीक्षा परिणाम की पुष्टि और व्यक्तिगत सत्यापन कितना जरूरी है।

निष्कर्ष

बुलंदशहर और दिल्ली की शिखाओं के बीच यह AIR-113 विवाद UPSC परीक्षा की साख और उम्मीदवारों की भावनाओं पर असर डाल रहा है। हालांकि, वास्तविक चयनित उम्मीदवार दिल्ली की शिखा ही हैं। बुलंदशहर की शिखा ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और मामले को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

यह विवाद UPSC परीक्षा के प्रति लोगों की संवेदनशीलता और सोशल मीडिया की शक्ति को भी उजागर करता है।

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