20 Aug 2026, Thu

UGC के नियमों पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कही बड़ी बात, कहा- ‘हम इस पर फिर से विचार कर रहे हैं’

नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के ‘इक्विटी रेगुलेशंस, 2026’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि वह इन नियमों पर दोबारा विचार कर रहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि नियमों के मौजूदा स्वरूप में बदलाव की संभावना पर सरकार विचार कर सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अंतिम फैसला क्या होगा।

UGC के इन नियमों को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिलहाल इन नियमों के लागू होने पर रोक लगा रखी है। अब केंद्र के ताजा बयान के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हुई। केंद्र सरकार और UGC की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार नियमों पर पुनर्विचार कर रही है।

तुषार मेहता ने कहा कि वह यह नहीं बता रहे हैं कि अंतिम निर्णय क्या होगा, लेकिन सरकार इन नियमों पर फिर से विचार कर रही है। केंद्र के इस बयान से साफ है कि UGC के नए नियमों को लेकर सरकार स्तर पर भी मंथन जारी है।

UGC को चार हफ्ते में देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने UGC को नियमों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि UGC अपने जवाबी हलफनामे में याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए सभी प्रमुख मुद्दों को शामिल करे।

UGC को हलफनामे की प्रतियां सभी याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध करानी होंगी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद मामले की अगली सुनवाई में नियमों के कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर आगे विचार किया जा सकता है।

क्या है UGC Equity Regulations 2026 का विवाद?

UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े मामलों से निपटने के लिए ‘इक्विटी रेगुलेशंस, 2026’ जारी किए थे। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के लिए समान और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना बताया गया था।

हालांकि, नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्तियां सामने आईं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा और सुरक्षा का दायरा स्पष्ट नहीं है। कुछ याचिकाओं में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या नियम सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान सुरक्षा प्रदान करते हैं।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण UGC के इन नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। केंद्र सरकार के पुनर्विचार के बयान और UGC के प्रस्तावित जवाबी हलफनामे के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है। अब देखना होगा कि सरकार और UGC नियमों में कोई संशोधन करते हैं या मौजूदा प्रावधानों को ही आगे बढ़ाने का फैसला लेते हैं।

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