मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन अस्थिरता का माहौल देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत से लेकर समापन तक निवेशक लगातार खरीदारी और बिकवाली के बीच उलझे रहे। हालांकि बाजार ने कई बार तेजी दिखाने की कोशिश की, लेकिन अंत में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा। इसके बावजूद कुछ सेक्टरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को बड़े नुकसान से बचने में मदद मिली।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 141.90 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,867.80 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 6.55 अंक यानी 0.03 प्रतिशत कमजोर होकर 23,907.15 अंक पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में बाजार कई बार हरे और लाल निशान के बीच झूलता रहा, जो निवेशकों की अनिश्चितता को दर्शाता है।
बाजार की व्यापक तस्वीर पर नजर डालें तो कुल 2168 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1877 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों की रुचि चुनिंदा सेक्टरों और शेयरों में बनी रही। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा मोटर्स, एनटीपीसी और इटरनल के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। मेटल और पावर सेक्टर में निवेशकों ने जमकर निवेश किया, जिसके चलते इन कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर ओएनजीसी, आईटीसी, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक और विप्रो जैसे दिग्गज शेयर दबाव में रहे। विशेष रूप से बैंकिंग और आईटी सेक्टर में बिकवाली के कारण बाजार की तेजी सीमित हो गई।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो मीडिया, पावर और कैपिटल गुड्स सेक्टर दिन के सबसे बड़े विजेता रहे। इन क्षेत्रों के सूचकांकों में लगभग 3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, मेटल और टेलीकॉम सेक्टर भी मजबूत प्रदर्शन करने में सफल रहे। वहीं आईटी, एफएमसीजी, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली, जिसने बाजार पर दबाव बनाए रखा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स ने भी हल्की मजबूती दिखाई। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में मिड और स्मॉलकैप कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं।
बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। हालिया घटनाक्रमों के बाद वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। तेल की कीमतों में संभावित उछाल का असर भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके अलावा एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, लेकिन घरेलू आर्थिक संकेतक अभी भी निवेशकों को भरोसा देने का काम कर रहे हैं।

