रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन की राजधानी कीव बुधवार रात रूस के भीषण हवाई हमलों से दहल उठी, जब रूसी सेना ने सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइलों के जरिए नागरिक इलाकों को निशाना बनाया। इस हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। बीते दो हफ्तों में यह रूस का सबसे बड़ा हवाई हमला माना जा रहा है।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमले में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जानकारी दी कि रूस ने लगभग 700 ड्रोन दागे, जिनमें से बड़ी संख्या में ईरान निर्मित ‘शाहेद’ ड्रोन भी शामिल थे। इसके अलावा कई घातक मिसाइलें भी दागी गईं, जिससे राजधानी सहित कई शहरों में भारी तबाही हुई।
कीव में इस हमले का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि इसमें एक 12 वर्षीय बच्चे समेत कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। राजधानी में चार लोगों की मौत और 50 से अधिक लोग घायल हुए। वहीं दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा में नौ लोगों की मौत और 23 लोग घायल हुए हैं। मध्य यूक्रेन के डिनिप्रो क्षेत्र में तीन लोगों की जान गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। इसके अलावा ज़ापोरिज्जिया क्षेत्र में भी एक व्यक्ति की मौत की खबर है।
यूक्रेन की वायुसेना ने दावा किया है कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश हमलों को विफल कर दिया। कुल 703 हवाई लक्ष्यों में से 667 को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया गया। इसके बावजूद 20 ड्रोन और 12 मिसाइलें 26 अलग-अलग स्थानों पर गिरने में सफल रहीं, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
विदेश मंत्री सिबिहा ने इस हमले को “युद्ध अपराध” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि नागरिक क्षेत्रों पर इस तरह के हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में रूस द्वारा हमलों की तीव्रता बढ़ाना इस बात का संकेत है कि युद्ध और अधिक लंबा और जटिल हो सकता है। लगातार बढ़ते हमलों से न केवल यूक्रेन की सुरक्षा स्थिति कमजोर हो रही है, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी भी खतरे में पड़ती जा रही है।
कुल मिलाकर, यह हमला एक बार फिर इस युद्ध की भयावहता को उजागर करता है, जहां सबसे ज्यादा कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की अपीलें जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं।

