मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित “संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज” कार्यक्रम में शिरकत की और संघ की भूमिका व उद्देश्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP संघ की पार्टी नहीं है, बल्कि संघ के स्वयंसेवक उसमे शामिल हैं।
संघ को समझने का सही तरीका
भागवत ने कहा, “संघ को दूर से देखना गलतफहमी होगी। संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं, लेकिन यह पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। संघ का काम केवल देश और समाज के लिए है। किसी एक राजनीतिक दल के लिए नहीं।”
उन्होंने बताया कि संघ में लाठी काठी सीखने, संगीत और घोष की धुन बजाने जैसी गतिविधियां होती हैं, लेकिन संघ राजनीतिक पार्टी नहीं है। संघ का उद्देश्य समाज को संगठित करना है, किसी विशेष पार्टी या समूह को प्रेशर ग्रुप बनाने का नहीं।
संघ का उद्देश्य और सिद्धांत
RSS प्रमुख ने कहा, “संघ का काम संघ के लिए नहीं है, पूरे देश के लिए है। संघ किसी के विरोध में नहीं चलता। हमारा उद्देश्य केवल समाज के सभी हिस्सों को संगठित करना है। संघ को लोकप्रियता या पावर नहीं चाहिए।”
भागवत ने संघ को समझने का तरीका भी बताया: “संघ को देखना है तो उसकी शाखाओं और कार्यकर्ताओं के घर-परिवार को देखें। संघ अलग संगठन खड़ा नहीं करता। देश के भाग्य में परिवर्तन तब आता है जब पूरा समाज एकजुट होता है।”
भारत और हिंदू पहचान पर विचार
मोहन भागवत ने हिंदू शब्द और उसकी पहचान पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “भारत में हिंदू केवल धर्म या समुदाय नहीं है। हिंदू एक विश्लेषण और जीवन दृष्टि है। संत गुरु नानक जी ने सबसे पहले हिंदू शब्द का प्रयोग किया। हमारा आपसी व्यवहार सौदे पर नहीं, अपनेपन पर चलता है। हिंदुस्तान का सनातन स्वभाव बदलता नहीं।”
उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की बजाय पंथनिरपेक्षता की आवश्यकता बताई और कहा कि भारत के मुसलमान और ईसाई अन्य देशों के जैसे नहीं हैं।
देश में चार तरह के हिंदू
RSS प्रमुख ने देश में हिंदू पहचान के चार रूप बताए:
गर्व से कहो – हम हिंदू हैं।
हां हम हिंदू हैं।
जोर से मत बोलो – हम हिंदू हैं।
जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं।
भागवत ने जोर देकर कहा कि समाज को संगठित करना संघ का पहला उद्देश्य है और इसके लिए किसी को छोड़ना नहीं चाहिए।

