जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा और प्रदर्शन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) से अपील की है कि वह स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां प्रतिनिधिमंडल भेजे, ताकि जमीनी हालात दुनिया के सामने आ सकें।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके में लोगों पर अत्याचार हो रहा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन जो खबरें सामने आ रही हैं वे बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।
UN से दौरे की अपील
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि United Nations के अधिकारियों को पीओके का दौरा करना चाहिए और वहां की वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा करने से दुनिया को वहां के लोगों की समस्याओं और संघर्षों की सही जानकारी मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाए, ताकि स्थानीय लोगों की स्थिति को समझा जा सके और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।
पीओके में लगातार प्रदर्शन
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये प्रदर्शन बेहतर शासन, आर्थिक राहत, राजनीतिक अधिकार और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व Joint Awami Action Committee कर रही है। इस संगठन ने स्थानीय मुद्दों जैसे बिजली, रोजगार, सड़क और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर आंदोलन शुरू किया था, जो अब व्यापक रूप ले चुका है।
हिंसा और झड़पें
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है। हालात को नियंत्रित करने के लिए कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फराबाद और रावलकोट सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
मांगें और बढ़ता असंतोष
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें आर्थिक राहत, बेहतर प्रशासन और राजनीतिक अधिकारों से जुड़ी हैं। हालांकि, हालात बिगड़ने के बाद कई जगहों पर टकराव बढ़ गया, जिससे तनाव और अधिक गहरा हो गया है।
निष्कर्ष
पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शन और हिंसा ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर स्थानीय लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी और अंतरराष्ट्रीय अपील भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

