प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई अहम नामों में बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य व सेवा की सोच को मजबूत करना बताया गया है।
हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और उसके आसपास के प्रशासनिक ब्लॉक्स का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। इसके अलावा, राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ कर दिया गया, जो देश की सेवा और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।
सरकारी संस्थानों और परियोजनाओं के नामों में भी बदलाव हुआ है। योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग रखा गया, ताकि नीति निर्माण और विकास के लिए अधिक स्पष्ट और समर्पित दृष्टिकोण दिखाया जा सके। इसी तरह, ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के नाम पर बनी सड़क का नाम बदलकर मुगल राजकुमार दारा शिकोह के नाम पर रखा गया, जिन्हें भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह नाम परिवर्तन सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं हैं, बल्कि ये लोक भावना और राष्ट्रभक्ति की पहचान को मजबूत करने वाले कदम हैं। सरकार ने इस दिशा में कई अन्य महत्वपूर्ण नाम परिवर्तन भी किए हैं, जो शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में भारतीय मूल्यों और इतिहास को प्रतिबिंबित करते हैं।
यह प्रक्रिया लगातार चर्चा का विषय रही है। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक पुनरुत्थान और देशभक्ति का प्रतीक मानते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक सोच से जोड़कर देखते हैं। फिर भी, सरकार के अनुसार, इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना और नागरिकों में कर्तव्य-बोध जगाना है।
इस नए नामांकन के साथ, प्रधानमंत्री कार्यालय अब ‘सेवा तीर्थ’ बन गया है और राजपथ अब ‘कर्तव्य पथ’ के रूप में जाना जाएगा। यह बदलाव भारत के इतिहास, संस्कृति और लोक भावना को सम्मानित करने का प्रतीक माना जा रहा है।

