नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को आम बजट पेश किए जाने के कुछ दिनों बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 से जुड़े मसौदा नियम और फॉर्म्स सार्वजनिक टिप्पणी (Public Comments) के लिए जारी कर दिए हैं। इन प्रस्तावित नियमों में PAN कार्ड से जुड़े कई अहम बदलाव सुझाए गए हैं, जिनका असर आम करदाताओं से लेकर कंपनियों और क्रिप्टो एक्सचेंज तक पर पड़ेगा।
कैश ट्रांजैक्शन में PAN की नई सीमा
प्रस्तावित इनकम टैक्स नियम, 2026 के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के एक या एक से अधिक बैंक खातों में एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी होती है, तो PAN नंबर देना अनिवार्य होगा।
वर्तमान नियमों के तहत एक दिन में 50,000 रुपये से अधिक नकद जमा या निकासी पर PAN देना जरूरी होता है। नए नियमों से सालाना आधार पर निगरानी और सख्त हो जाएगी।
गाड़ी खरीदने पर PAN नियमों में बदलाव
नए मसौदा नियमों में वाहन खरीद से जुड़े PAN नियमों में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये से अधिक कीमत की कार या बाइक खरीदता है, तो उसे PAN नंबर देना होगा।
मौजूदा नियमों में कार खरीदने पर कीमत चाहे जितनी भी हो, PAN जरूरी होता है, जबकि बाइक खरीद पर PAN अनिवार्य नहीं था। नया नियम दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करेगा।
प्रॉपर्टी डील में PAN की सीमा बढ़ी
अचल संपत्ति से जुड़े लेनदेन में भी PAN से जुड़ी सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। अभी किसी प्रॉपर्टी की खरीद, बिक्री, गिफ्ट या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के लिए 10 लाख रुपये की सीमा तय है। नए नियमों के तहत इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जा सकता है। इससे छोटे प्रॉपर्टी सौदों में PAN की अनिवार्यता कम होगी।
होटल, रेस्टोरेंट और इवेंट्स में भुगतान पर PAN
मसौदा नियमों के अनुसार, होटल या रेस्टोरेंट के बिल, कन्वेंशन सेंटर, बैंक्वेट हॉल या इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं के लिए 1 लाख रुपये से अधिक भुगतान पर PAN देना जरूरी होगा। वर्तमान में यह सीमा 50,000 रुपये है।
कंपनियों, क्रिप्टो और CBDC से जुड़े नए प्रावधान
मसौदा नियमों में कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं (Perquisites) की वैल्यू बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा, क्रिप्टो एक्सचेंजों को इनकम टैक्स विभाग के साथ लेनदेन से जुड़ी जानकारी साझा करना अनिवार्य किया जा सकता है।
साथ ही, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आधिकारिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के रूप में मान्यता देने का भी प्रस्ताव शामिल है।
CBDT ने इन सभी मसौदा नियमों पर आम जनता, कर विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। अंतिम नियम इन्हीं प्रतिक्रियाओं के आधार पर तय किए जाएंगे।

