अफगानिस्तान–पाकिस्तान युद्ध पर ईरान ने जताया विरोध, रमजान में संवाद के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव
तेहरान: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष पर ईरान ने पहली प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रमजान के पवित्र महीने में इस युद्ध को “गलत” करार दिया और दोनों देशों से संवाद के जरिए समाधान खोजने की अपील की। उन्होंने कहा कि रमजान युद्ध का महीना नहीं है बल्कि भाईचारे, प्रेम और एकजुटता का प्रतीक है।
अराघची ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “रमज़ान के पवित्र महीने में, जो इस्लामी जगत में आत्मसंयम और एकजुटता को मजबूत करने का महीना है, यह उचित है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान अच्छे पड़ोसी संबंधों के दायरे में और संवाद के माध्यम से अपने मौजूदा मतभेदों का समाधान करें। ईरान दोनों देशों के बीच संवाद को सुगम बनाने और आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।”
ईरान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार की आधी रात अफगानिस्तान पर सैन्य कार्रवाई की। पाकिस्तान के इस एयरस्ट्राइक अभियान में राजधानी काबुल और अन्य क्षेत्रों में कई मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, अभी तक किसी भी मौत की आधिकारिक खबर सामने नहीं आई है।
इसके जवाब में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के कई ठिकानों पर हमले किए। अफगान अधिकारियों का दावा है कि इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 55 सैनिक मारे गए, 19 चौकियों पर कब्जा किया गया और 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव कब्जे में लिए गए। इसी बीच अफगानिस्तान के तालिबान ने पाकिस्तान के सबसे अहम एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन हाल के सैन्य संघर्ष ने इसे और भी संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में ईरान का मध्यस्थता प्रस्ताव दोनों देशों के लिए शांतिपूर्ण समाधान का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ईरान की यह पहल न केवल दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव को कम करने का प्रयास है, बल्कि पूरे इस्लामी जगत में रमजान के पवित्र माह के महत्व को भी रेखांकित करती है। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान शांति स्थापना और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए तैयार है।
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब यह देख रहे हैं कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान ईरान के इस मध्यस्थता प्रयास को स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि दोनों पक्ष बातचीत और कूटनीतिक समाधान की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो क्षेत्र में स्थिरता बहाल हो सकती है। वहीं, लगातार सैन्य संघर्ष के चलते भविष्य में गंभीर सुरक्षा खतरों की आशंका भी बनी हुई है।
यह संघर्ष और ईरान की प्रतिक्रिया दोनों ही सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रमुख चर्चा का विषय बन गए हैं। विशेषज्ञ और राजनयिक सभी क्षेत्रीय देशों से अपील कर रहे हैं कि वे संयम और कूटनीतिक संवाद के जरिए इस संकट का समाधान करें।

