Pak-Afghanistan War: तालिबान का पाकिस्तान पर ड्रोन हमले का दावा, PM ऑफिस के पास ठिकाने निशाने पर
काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तालिबान ने बड़ा दावा किया है। तालिबान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने कहा है कि पाकिस्तान में कई अहम सैन्य ठिकानों पर आत्मघाती ड्रोन से हमले किए गए हैं। इन हमलों में इस्लामाबाद के फैजाबाद इलाके में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास के क्षेत्र को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।
तालिबान की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ये हमले पाकिस्तान की ओर से काबुल, कंधार और पक्तिया में किए गए कथित हवाई हमलों के जवाब में किए गए हैं। तालिबान ने अपने ऑपरेशन को “पूरी तरह सफल” बताया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
किन ठिकानों को बनाया निशाना?
तालिबान के प्रवक्ता के अनुसार, इस्लामाबाद के फैजाबाद क्षेत्र के पास सैन्य कैंप, नौशेरा में सेना छावनी, जमरूद सैन्य कॉलोनी और एबटाबाद में कुछ प्रतिष्ठानों को ड्रोन हमलों का लक्ष्य बनाया गया। उनका कहना है कि इन हमलों में पाकिस्तान की सेना के महत्वपूर्ण केंद्रों और सैन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पिछले कुछ दिनों से लगातार सैन्य गतिविधियां तेज हैं। गुरुवार की आधी रात पाकिस्तान ने काबुल में तालिबान के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक करने का दावा किया था। पाकिस्तान का कहना था कि इस कार्रवाई में कई शीर्ष तालिबानी कमांडर और लगभग 130 लड़ाके मारे गए।
जवाबी कार्रवाई और बढ़ता तनाव
पाकिस्तान के हमले के बाद अफगानिस्तान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया गया। तालिबान समर्थित सूत्रों के अनुसार, उनकी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 15 से अधिक को बंधक बनाया गया और 23 चौकियों पर कब्जा किया गया। अब ताजा दावे में पाकिस्तान के भीतर ड्रोन हमलों की बात कही गई है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है। दोनों ही देश पहले से ही आतंरिक सुरक्षा और सीमा संबंधी मुद्दों से जूझ रहे हैं। ऐसे में खुला संघर्ष हालात को और जटिल बना सकता है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
अब तक पाकिस्तान की सरकार या सेना की ओर से तालिबान के ड्रोन हमलों के दावों पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बेहद जरूरी है, क्योंकि युद्ध जैसे हालात में सूचना युद्ध भी तेज हो जाता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी नई कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं।
क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।

