10 Aug 2026, Mon

Old Pension Scheme पर सरकार का झटका! बहाली का कोई प्रस्ताव नहीं, लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों पर फिरा पानी

पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की ओर से बड़ा झटका लगा है। सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में लिखित जवाब देते हुए कहा कि OPS को बहाल करना केंद्र सरकार के लिए वित्तीय रूप से व्यावहारिक नहीं है और इससे सरकारी खजाने पर दीर्घकालिक बोझ बढ़ सकता है।

सरकार के इस बयान के बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों और OPS बहाली की मांग कर रहे संगठनों को फिलहाल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न कर्मचारी संगठन OPS की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं।

सरकार ने बताई OPS बहाल न करने की वजह

वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने से सरकार पर लगातार बढ़ता वित्तीय दायित्व आएगा। सरकार का मानना है कि OPS के तहत पेंशन का भुगतान पूरी तरह सरकारी खजाने से होता है, जबकि वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) अंशदायी (कॉन्ट्रिब्यूटरी) व्यवस्था पर आधारित है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यों में OPS लागू करना संबंधित राज्य सरकारों का अधिकार क्षेत्र है। केंद्र सरकार इस संबंध में राज्यों के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करती। राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसी कुछ राज्य सरकारों ने NPS से OPS में लौटने का निर्णय लिया था और इसकी जानकारी केंद्र सरकार तथा पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) को दी थी।

NPS से OPS में वापसी क्यों मुश्किल?

सरकार ने संसद में बताया कि मौजूदा नियमों के तहत NPS में जमा कर्मचारी और सरकार के योगदान, साथ ही उस पर अर्जित निवेश लाभ को निकालकर राज्य सरकार को वापस करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसका मतलब यह है कि NPS से OPS में वापसी केवल राजनीतिक निर्णय का विषय नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय, कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि NPS के तहत जमा राशि बाजार आधारित निवेश से जुड़ी होती है, इसलिए इसे वापस लेकर OPS व्यवस्था में समायोजित करना आसान प्रक्रिया नहीं है।

केंद्र ने UPS को बनाया विकल्प

केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को अधिक सुनिश्चित पेंशन लाभ देने के उद्देश्य से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की है। यह योजना 1 अप्रैल 2025 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS के विकल्प के रूप में लागू हो चुकी है।

UPS के तहत पात्र कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद कम से कम ₹10,000 प्रति माह की सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान है। यह योजना कर्मचारी और सरकार दोनों के नियमित योगदान तथा निवेश आधारित ढांचे पर आधारित है।

NPS में 3.65 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति

सरकार के अनुसार, 7 जुलाई 2026 तक केंद्रीय कर्मचारियों के NPS खातों में लगभग ₹3.65 लाख करोड़ की संपत्ति प्रबंधन के तहत थी। सरकार का कहना है कि पेंशन प्रणाली में किसी भी बड़े बदलाव से पहले वित्तीय स्थिरता और भविष्य की देनदारियों का आकलन करना आवश्यक है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कुछ राज्यों में OPS लागू होने के बाद उसके वित्तीय प्रभाव को लेकर अपनी रिपोर्ट में चिंताएं जताई हैं।

फिलहाल केंद्र सरकार के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि OPS की बहाली पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं है। ऐसे में पुरानी पेंशन योजना की मांग कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों को निकट भविष्य में इस मुद्दे पर राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।

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