India vs Sri Lanka 2011 Final: भारत की ऐतिहासिक जीत के 15 साल, एमएस धोनी की कप्तानी में रचा गया था इतिहास
नई दिल्ली: आज से ठीक 15 साल पहले, 2 अप्रैल 2011 को भारतीय क्रिकेट टीम ने वनडे विश्व कप जीतकर देश को गौरव का सबसे बड़ा पल दिया था। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस ऐतिहासिक फाइनल में भारत ने श्रीलंका को हराकर 28 साल बाद विश्व कप अपने नाम किया था। इस जीत के हीरो रहे कप्तान MS Dhoni, जिन्होंने शानदार छक्का लगाकर भारत को खिताब दिलाया।
इस फाइनल मुकाबले में भारत की कप्तानी एमएस धोनी कर रहे थे, जबकि श्रीलंका की कमान कुमार संगकारा के हाथों में थी। मुकाबले से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प बातें हैं, जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
दो बार हुआ था टॉस
इस ऐतिहासिक फाइनल की सबसे अनोखी घटना टॉस से जुड़ी है। वानखेड़े स्टेडियम में भारी शोर के कारण पहली बार हुए टॉस में विवाद हो गया था। एमएस धोनी के टॉस जीतने के बाद श्रीलंका के कप्तान कुमार संगकारा ने दावा किया कि उन्होंने “हेड्स” कहा था और सिक्का भी उसी पर आया। हालांकि, शोर के कारण मैच रेफरी ठीक से सुन नहीं पाए।
स्थिति को संभालने के लिए निर्णय लिया गया कि टॉस दोबारा कराया जाएगा। दूसरी बार हुए टॉस में कुमार संगकारा ने जीत हासिल की और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, इसका ज्यादा फायदा श्रीलंकाई टीम को नहीं मिला।
धोनी का यादगार छक्का
फाइनल का सबसे यादगार पल वह था जब एमएस धोनी ने छक्का लगाकर भारत को जीत दिलाई। यह छक्का आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे महान शॉट्स में गिना जाता है। जिस बल्ले से धोनी ने यह छक्का लगाया था, उसकी बाद में नीलामी की गई और वह लगभग 72 लाख रुपये में बिका। आज के समय में इसकी कीमत करोड़ों में मानी जाती है।
सचिन तेंदुलकर का टोटका
विश्व कप 2011 के दौरान महान बल्लेबाज Sachin Tendulkar भी अपने एक खास टोटके के लिए जाने जाते थे। बताया जाता है कि वह मैच के दौरान हमेशा बाएं पैर में पहले पैड पहनते थे। हालांकि, फाइनल में वह जल्दी आउट हो गए, जिससे टीम पर दबाव बढ़ गया।
एक दिलचस्प किस्सा यह भी है कि जब वीरेंद्र सहवाग जल्दी आउट हो गए थे, तब सचिन ने उन्हें मैदान से उठने नहीं दिया और जब तक भारत ने जीत हासिल नहीं कर ली, वे वहीं बैठे रहे। बाद में जीत के बाद पूरा स्टेडियम जश्न में डूब गया।
भारत की ऐतिहासिक जीत
इस जीत ने भारत को एक बार फिर क्रिकेट की दुनिया में शीर्ष पर पहुंचा दिया। इसके बाद भारत ने कई आईसीसी ट्रॉफी जीतीं, लेकिन वनडे विश्व कप की ट्रॉफी अब तक दोबारा नहीं जीत सका है। यही वजह है कि 2011 की जीत आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय मानी जाती है।
निष्कर्ष
2011 का विश्व कप फाइनल सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक पल था। एमएस धोनी की कप्तानी, टीम इंडिया का प्रदर्शन और वानखेड़े में गूंजती जीत की आवाज आज भी लोगों के दिलों में ताजा है। आने वाले वर्षों में भी यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद की जाएगी।

