भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो गया है। बाजार नियामक SEBI ने 4 सितंबर 2026 को NSE को ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटकी एक्सचेंज की शेयर बाजार में लिस्टिंग की योजना अब आगे बढ़ने की स्थिति में पहुंच गई है। इस खबर के बाद निवेशकों की नजर अब IPO की तारीख, प्राइस बैंड और संभावित लिस्टिंग पर टिकी है।
करीब एक दशक से अटका था लिस्टिंग का प्लान
NSE की शेयर बाजार में लिस्टिंग की योजना कोई नई नहीं है। एक्सचेंज लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रहा था, लेकिन नियामकीय वजहों से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब SEBI की ओर से ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद इस प्रक्रिया को महत्वपूर्ण मंजूरी मिल गई है।
NSE ने 17 जून 2026 को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP नियामक के पास दाखिल किया था। अब आगे की प्रक्रिया में IPO से जुड़े अंतिम दस्तावेज, प्राइस बैंड और इश्यू की तारीख तय की जाएगी। हालांकि, फिलहाल कंपनी की ओर से IPO खुलने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।
30 हजार करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है इश्यू
प्रस्तावित IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS के रूप में हो सकता है। इसका मतलब है कि NSE नए शेयर जारी करने के बजाय मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। प्रस्ताव के तहत करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे जाने की बात सामने आई है।
यह हिस्सेदारी NSE की लगभग 6 प्रतिशत पेड-अप कैपिटल के बराबर हो सकती है। मौजूदा अनुमान के अनुसार IPO का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यदि अंतिम आकार और वैल्यूएशन इसी स्तर के आसपास रहता है, तो यह देश के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। हालांकि, वास्तविक आंकड़े प्राइस बैंड और अंतिम इश्यू संरचना तय होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बड़े शेयरधारक बेच सकते हैं अपनी हिस्सेदारी
IPO में NSE के कई मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। इनमें SBI समूह की हिस्सेदारी बिक्री प्रमुख मानी जा रही है। इसके अलावा कई बड़े संस्थागत निवेशक भी ऑफर फॉर सेल के जरिए अपने शेयर बेचने की तैयारी में हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि कौन सा निवेशक कितने शेयर ऑफर करता है और IPO का अंतिम आकार कितना रहता है। बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी की वजह से इस इश्यू को लेकर बाजार में काफी दिलचस्पी देखी जा रही है।
निवेशकों की नजर अब अगली घोषणाओं पर
SEBI की मंजूरी के बाद NSE के IPO की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। अब प्राइस बैंड, IPO खुलने और बंद होने की तारीख तथा लिस्टिंग से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। यदि प्रस्तावित योजना के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो NSE की शेयर बाजार में एंट्री भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगी।
हालांकि, निवेशकों को IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी के अंतिम दस्तावेज, वैल्यूएशन, प्राइस बैंड और जोखिम से जुड़ी जानकारी को ध्यान से देखना चाहिए। केवल बड़े नाम या चर्चित IPO होने के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता।

