मुंबई। भारत के सबसे बड़े शेयर बाजार एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास मसौदा दस्तावेज (DRHP) दाखिल कर दिए हैं। करीब 30,000 करोड़ रुपये के अनुमानित आकार वाला यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक साबित हो सकता है। यदि यह इश्यू तय आकार में आता है, तो यह अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा।
मसौदा दस्तावेजों के अनुसार, एनएसई का आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि कंपनी इस इश्यू के जरिए कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। प्रस्तावित आईपीओ के तहत कुल 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी, जो एक्सचेंज की लगभग 6 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है।
इस आईपीओ में कई बड़े संस्थागत निवेशक और शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सबसे बड़े विक्रेताओं में शामिल है, जो करीब 2.48 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। इसके अलावा एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयर, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड 1.19 करोड़ शेयर, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स 1.12 करोड़ शेयर, बैंक ऑफ बड़ौदा 1.10 करोड़ शेयर और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 1.09 करोड़ शेयर बेचेंगे।
वर्तमान में एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी सहयोगी कंपनी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दूसरी ओर, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), जो एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक है और जिसके पास 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इस आईपीओ में कोई शेयर नहीं बेचेगी।
एनएसई की लिस्टिंग की कहानी लगभग एक दशक पुरानी है। एक्सचेंज ने पहली बार वर्ष 2016 में आईपीओ लाने के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे। उस समय कंपनी करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही थी। हालांकि, को-लोकेशन विवाद और अन्य नियामकीय चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी रोक दी थी, जिससे यह प्रक्रिया वर्षों तक अटकी रही।
को-लोकेशन मामले में कुछ ब्रोकरों पर एनएसई की ट्रेडिंग प्रणाली तक विशेष पहुंच प्राप्त करने के आरोप लगे थे। इस विवाद ने एनएसई की लिस्टिंग प्रक्रिया को लंबे समय तक प्रभावित किया। बाद में एक्सचेंज ने मामले के निपटारे के लिए सेबी के समक्ष आवेदन दायर किया और 1,388 करोड़ रुपये के भुगतान की पेशकश की। इसके बाद जनवरी 2025 में सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने के साथ आईपीओ प्रक्रिया को नई गति मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई का मूल्यांकन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है। करीब 1.8 लाख शेयरधारकों वाले इस एक्सचेंज का आईपीओ निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक साबित हो सकता है। अब बाजार की नजर सेबी की अंतिम मंजूरी और आईपीओ की लॉन्चिंग टाइमलाइन पर टिकी हुई है, क्योंकि यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।

