चंडीगढ़। पंजाब में अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का आंदोलन अब तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार के खिलाफ बुधवार, 27 अगस्त को प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर ‘महा हड़ताल’ कर रहे हैं। कर्मचारियों के इस आंदोलन का सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ने की आशंका है। राज्य में 3 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों और 4 लाख से अधिक पेंशनरों के आंदोलन में शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
कई दिनों तक प्रभावित रह सकता है कामकाज
27 अगस्त को होने वाली हड़ताल के अगले दिन यानी 28 अगस्त को रक्षाबंधन का सरकारी अवकाश है। इसके बाद शनिवार और रविवार होने के कारण लगातार कई दिनों तक सरकारी दफ्तरों में नियमित कामकाज प्रभावित रहने की संभावना है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में अपना काम कराने पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हड़ताल के दौरान सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक कई सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहेगा। उपायुक्त कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, तहसील और राजस्व विभाग से जुड़े कामों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक आंदोलन में परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत विभिन्न विभागों के कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं। इससे रोडवेज बस सेवाओं, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित होने की आशंका है। स्कूल और कॉलेजों से जुड़े कर्मचारी भी आंदोलन का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके। इसके बावजूद ओपीडी और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल का असर पड़ सकता है।
क्या हैं सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। आंदोलन के जरिए वे सरकार पर इन मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बना रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बकाया महंगाई भत्ते यानी DA का भुगतान शामिल है।
कर्मचारी संगठन 18 प्रतिशत बकाया DA जारी करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने और अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा है।
पेंशनर संगठन भी बकाया महंगाई भत्ते के भुगतान को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कुछ कर्मचारी संगठनों ने हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप महंगाई भत्ते और उसके बकाये का भुगतान करने की मांग उठाई है।
सरकार पर बढ़ रहा दबाव
कर्मचारियों और पेंशनरों के इस प्रदेशव्यापी आंदोलन से पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ गया है। संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिलने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
वहीं, लगातार छुट्टियों के बीच हड़ताल होने से सरकारी सेवाओं पर इसका असर कई दिनों तक महसूस किया जा सकता है। खासतौर पर तहसील, राजस्व, परिवहन और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जरूरी काम कराने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।
फिलहाल कर्मचारियों की ‘महा हड़ताल’ के कारण पंजाब में सरकारी कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बन गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।

