मिडिल-ईस्ट में तनाव चरम पर: 29वें दिन भी जारी जंग, अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच बढ़ा टकराव
मिडिल-ईस्ट में चल रहा युद्ध अपने 29वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर हमलों का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर उसने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें कई अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर है। यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, ईरान ने सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मिसाइल हमला किया है। इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और कई सैन्य विमान भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उपग्रह तस्वीरों से भी इस हमले में हुए नुकसान की पुष्टि की गई है। यह हमला अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसके परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया है। इससे पहले इजरायल ने ईरान पर हमले तेज करने की चेतावनी दी थी। ईरान के मुताबिक, भारी जल संयंत्र और येलोकेक उत्पादन संयंत्र को भी निशाना बनाया गया, हालांकि इन हमलों से बड़े स्तर पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी एक बयान देकर चर्चा को और बढ़ा दिया। उन्होंने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज’ को गलती से ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया, हालांकि बाद में उन्होंने अपनी बात सुधार ली। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ईरान के खतरे को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में सीजफायर के लिए बातचीत हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कराने की कोशिश कर सकता है, हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक सहमति नहीं बनी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
इस बीच, ईरान के एक राजनयिक ने कहा है कि वह हॉर्मूज स्ट्रेट के जरिए मानवीय सहायता के सुरक्षित आवागमन में सहयोग करेगा। यह कदम संयुक्त राष्ट्र के अनुरोध के बाद उठाया गया है। यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो सकता है।
रूस की भूमिका भी इस संघर्ष में सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ईरान को उन्नत ड्रोन भेज रहा है। ये ड्रोन पहले ईरान द्वारा रूस को यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रदान किए गए ड्रोन के उन्नत संस्करण हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय संघर्ष को और जटिल बना सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने चेतावनी दी है कि इजरायल को इन हमलों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं ईरानी सेना ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है कि वे ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करके ‘आग से खेल रहे हैं’। इस तरह की बयानबाजी से क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ता जा रहा है।
भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया की स्थिति और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलते हालात में सतर्कता, तैयारी और समन्वय बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर पड़ सकता है। खासकर हॉर्मूज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर किसी भी तरह की अस्थिरता दुनिया भर में तेल की कीमतों और व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में शांति वार्ता या सैन्य कार्रवाई—दोनों ही संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह युद्ध अब वैश्विक चिंता का बड़ा कारण बन चुका है।

