Israel-US-Iran War Live: 35वें दिन भी जारी भीषण जंग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी
मध्य-पूर्व में जारी इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब 35वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच हालात और भी तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इस बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।
ताजा घटनाक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस अहम जलमार्ग से जहाजरानी सेवाओं को फिर से सामान्य करने के लिए मिलकर काम करने का वादा किया है। सियोल में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
इधर, जंग के मोर्चे पर हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के दो MQ-9 ड्रोन मार गिराए हैं, जिनका मलबा मध्य ईरान में देखा गया है। वहीं, अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के एक बड़े पुल को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 8 लोगों की मौत और 95 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन जारी रखा है। ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले इजरायल की राजधानी तेल अवीव सहित कई क्षेत्रों में जारी हैं। इन हमलों में अब तक 148 लोगों के घायल होने की खबर है। एक वीडियो में ईरानी मिसाइल को बादलों के बीच से निकलते हुए अपने लक्ष्य को भेदते देखा गया, जिसने इस युद्ध की गंभीरता को और उजागर कर दिया है।
इस बीच एक गुप्त रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी पूरी तरह बरकरार है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ईरान के मिसाइल सिस्टम को कमजोर करने का दावा किया था। इससे संकेत मिलता है कि युद्ध अभी लंबा खिंच सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इस मुद्दे पर 60 देशों की एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसमें भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस जलमार्ग में बाधा जारी रहती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति—तीनों ही दांव पर लगे हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

