ईरान ने बदली युद्ध रणनीति, पर्यटन स्थलों को बनाया नया निशाना; मिडिल-ईस्ट तनाव और गहराया
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए नया ऐलान किया है। करीब 21 दिनों से जारी संघर्ष के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ वैश्विक स्तर पर पर्यटन और मनोरंजन स्थलों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
ईरान के सैन्य प्रवक्ता जनरल अबोलफज्ल शेकारची ने चेतावनी देते हुए कहा कि दुश्मन देशों के लिए अब दुनिया भर में “पार्क, मनोरंजन क्षेत्र और पर्यटन स्थल सुरक्षित नहीं रहेंगे।” इस बयान को ईरान की बदली हुई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पारंपरिक सैन्य ठिकानों के बजाय सॉफ्ट टारगेट्स को निशाना बनाया जा सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में तेहरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेता मारे गए हैं और उसके हथियार तथा ऊर्जा ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी सैन्य क्षमता अभी भी बरकरार है।
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता अली मोहम्मद नाइनी ने कहा कि देश युद्ध की स्थिति में भी लगातार मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है और उसके भंडार में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि, इस बयान के कुछ समय बाद ही ईरानी मीडिया में उनकी मौत की खबर भी सामने आई, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं।
दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि इजरायली हमलों ने ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल उत्पादन क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया है। इजरायल का कहना है कि वह ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभियान जारी रखेगा।
इस बीच, क्षेत्र में हमलों का सिलसिला भी तेज हो गया है। ईरानी ड्रोन हमलों ने कुवैत की मिना अल-अहमदी रिफाइनरी को निशाना बनाया, जहां आग लग गई। यह रिफाइनरी प्रतिदिन लगभग 7.3 लाख बैरल तेल प्रोसेस करती है और इसे क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा इकाइयों में गिना जाता है। इसके अलावा बहरीन और सऊदी अरब में भी हमलों की कोशिशें हुईं, जिन्हें आंशिक रूप से नाकाम कर दिया गया।
दुबई में भी विस्फोटों की खबर सामने आई है, जहां एयर डिफेंस सिस्टम ने कई प्रोजेक्टाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। यह घटनाएं उस समय हुईं जब क्षेत्र में लोग ईद-उल-फितर की तैयारियों में जुटे थे।
इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बना हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। यदि इस क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान की नई रणनीति ने युद्ध को और व्यापक और खतरनाक बना दिया है। अब खतरा केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आम नागरिकों और वैश्विक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस संकट को कूटनीतिक स्तर पर कैसे सुलझाया जाता है।

