23 Mar 2026, Mon

Israel US Iran War: भारतीय ध्वज वाले LPG युक्त 2 और जहाज होर्मुज से भारत की ओर रवाना

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से ईरान ने दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज – “जग वसंत” और “पाइन गैस” – फारस की खाड़ी से भारत की ओर रवाना हो चुके हैं और देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये दोनों टैंकर तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) से भरे हुए हैं और वर्तमान में यूएई के शारजाह के पास से होकर होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे हैं। “जग वसंत” को Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) ने चार्टर्ड किया है, जबकि “पाइन गैस” का संचालन Indian Oil Corporation (IOC) द्वारा किया जा रहा है। दोनों जहाजों में भारतीय क्रू सवार हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब Iran, Israel और United States के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस परिवहन होता है, इस समय बेहद संवेदनशील स्थिति में है। युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से पहले इस मार्ग से रोजाना 100 से अधिक जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या काफी घटकर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को रोक दिया था। ऐसे में भारतीय टैंकरों को पारगमन की अनुमति मिलना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

इससे पहले भी कुछ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं, जिनमें भारतीय नौसेना और कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका रही है। भारत ने अपने 20 से अधिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की मांग की थी, जिस पर ईरान की ओर से सहयोग देखने को मिला है।

भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए इन टैंकरों का समय पर पहुंचना बेहद जरूरी है। यदि सप्लाई बाधित होती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और महंगाई पर पड़ सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल और गैस की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

फिलहाल भारतीय सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इन टैंकरों के सुरक्षित भारत पहुंचने के बाद उन्हें मुंद्रा और कोचीन जैसे बंदरगाहों पर उतारा जाएगा। यह पूरी घटना भारत की संतुलित विदेश नीति को भी दर्शाती है, जहां वह सभी पक्षों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है।

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