ईरान युद्ध पर ट्रंप का 15 सूत्री सीजफायर प्रस्ताव सामने, सख्त शर्तों से समझौते की उम्मीद कम
इजरायल–अमेरिका–ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान को भेजे गए 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव का खुलासा हुआ है। हालांकि इस प्रस्ताव में रखी गई कड़ी शर्तों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि Iran इसे आसानी से स्वीकार नहीं करेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर 5 दिनों तक हमला न करने के ऐलान के बाद यह प्रस्ताव भेजा है। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रस्ताव को सीधे नहीं बल्कि Pakistan के माध्यम से तेहरान तक पहुंचाया गया है। पाकिस्तान ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश भी की है, जिससे कूटनीतिक हल निकालने की कोशिश की जा रही है।
प्रस्ताव के साथ ही अमेरिका ने सैन्य तैयारियों को भी तेज कर दिया है। पहले से मध्य पूर्व में मौजूद करीब 50,000 सैनिकों के अलावा 1,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी है। साथ ही दो मरीन यूनिट्स की तैनाती भी की जा रही है, जिससे क्षेत्र में सैन्य दबाव और बढ़ सकता है।
ट्रंप के प्रस्ताव की शर्तें बेहद सख्त बताई जा रही हैं। इसमें ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने, यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और अपने सभी परमाणु ठिकानों—जैसे नतांज, इस्फहान और फोर्डो—को नष्ट करने की मांग की गई है। इसके अलावा ईरान को अपने मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करने के लिए भी कहा गया है।
प्रस्ताव में यह भी शर्त रखी गई है कि International Atomic Energy Agency (IAEA) को ईरान के सभी परमाणु स्थलों तक पूर्ण पहुंच दी जाए और हार्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक नौवहन के लिए हमेशा खुला रखा जाए।
वहीं, ईरान ने अपनी शर्तें भी साफ कर दी हैं। तेहरान का कहना है कि किसी भी वार्ता से पहले पूर्ण युद्धविराम जरूरी है, जिसमें अमेरिका और Israel दोनों शामिल हों। साथ ही ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। उसने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमले न करने की अंतरराष्ट्रीय गारंटी की भी मांग की है।
ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से भी इनकार कर दिया है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। वहीं दूसरी ओर, इजरायल इस प्रस्ताव से हैरान बताया जा रहा है, क्योंकि वह लगातार ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की वकालत करता रहा है।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए दोनों देशों की ओर से विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। जहां ट्रंप का दावा है कि बातचीत जारी है, वहीं ईरानी नेतृत्व ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है और साफ कहा है कि युद्ध “पूर्ण विजय” तक जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की योजना में ऐसी कोई शर्त नहीं है, जिसे ईरान आसानी से स्वीकार कर सके। ऐसे में यह प्रस्ताव शांति की दिशा में कदम कम और दबाव की रणनीति ज्यादा लगता है।
कुल मिलाकर, इस प्रस्ताव ने कूटनीतिक हल की उम्मीदों को और उलझा दिया है। जब तक दोनों पक्ष अपनी-अपनी कठोर शर्तों में नरमी नहीं लाते, तब तक इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना बेहद कम नजर आती है।

