23 Mar 2026, Mon

Israel-US और ईरान जंग के बीच पुतिन को क्यों है मोदी का इंतजार? लावरोव ने कहा-भारतीय PM आएंगे रूस

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति भी तेज होती नजर आ रही है। इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के रूस दौरे की चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने संकेत दिया है कि रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin इस साल पीएम मोदी के मॉस्को दौरे का इंतजार कर रहे हैं।

यह संभावित यात्रा ऐसे समय में चर्चा में आई है, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासतौर पर Strait of Hormuz में पैदा हुए संकट के चलते तेल आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।

रूस ने इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को “आक्रामक” करार दिया है। मॉस्को का मानना है कि ईरान आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दे रहा है और यह संघर्ष आगे चलकर परमाणु प्रसार के खतरे को बढ़ा सकता है। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शांति की अपील की है और BRICS जैसे मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया है।

भारत की भूमिका इस पूरे संकट में बेहद अहम मानी जा रही है। भारत एक तरफ ईरान के साथ ऊर्जा और रणनीतिक संबंध रखता है, तो दूसरी ओर इजरायल के साथ उसके मजबूत रक्षा सहयोग हैं। साथ ही अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक और सामरिक रिश्ते भी गहरे हैं। यही वजह है कि भारत को एक संतुलित और भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।

हाल ही में पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत कर क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर जोर दिया। साथ ही भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने पर भी चर्चा की गई। भारत लगातार ‘संवाद और कूटनीति’ के जरिए समाधान की वकालत कर रहा है।

ऐसे में रूस के लिए पीएम मोदी का संभावित दौरा काफी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा के जरिए दोनों देश न सिर्फ अपने पारंपरिक संबंधों को और मजबूत कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक संकट पर भी साझा रणनीति बना सकते हैं। भारत-रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में पहले से ही गहरे संबंध हैं, जो इस मुलाकात के बाद और मजबूत हो सकते हैं।

इसके अलावा, यह दौरा भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति को भी दर्शाता है, जिसमें वह अमेरिका, रूस और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखता है। रूस को उम्मीद है कि भारत इस संकट में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है और तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी का संभावित रूस दौरा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट संकट के समाधान पर भी पड़ सकता है। दुनिया की नजरें अब इस संभावित मुलाकात पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले समय में बड़े कूटनीतिक बदलाव का संकेत दे सकती है।

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