इजरायल-ईरान तनाव चरम पर, मिसाइल और ड्रोन हमलों से मध्य पूर्व में बढ़ा संकट
मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं। दोनों देशों के बीच यह टकराव अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने शुक्रवार को ईरान पर हमलों की एक नई लहर शुरू की। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों पर चर्चा की जा रही थी। इसके साथ ही, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक तनाव ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।
इजरायल ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह ईरान के हथियार उत्पादन केंद्रों और सैन्य ठिकानों पर हमले और तेज करेगा। वहीं, ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के कई हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। इन हमलों के दौरान इजरायल के कई शहरों में हवाई हमले के सायरन बजते देखे गए, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है।
सिर्फ इजरायल और ईरान ही नहीं, बल्कि यह संघर्ष अब अन्य देशों तक भी फैलता नजर आ रहा है। बेरूत के आसमान में धुएं के गुबार देखे गए, हालांकि इजरायल ने लेबनान की राजधानी पर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र के कई देशों जैसे कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में भी ईरान की ओर से ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों की जानकारी मिली है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
इसी बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। लगभग 2,500 मरीन सैनिकों का एक समूह इस क्षेत्र के पास पहुंच चुका है। साथ ही, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 पैराट्रूपर्स को भी तैनाती के लिए भेजा गया है, जिन्हें रणनीतिक ठिकानों और एयरबेस को सुरक्षित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। यह कदम अमेरिका की ओर से संभावित हस्तक्षेप या समर्थन की ओर संकेत करता है।
इस संघर्ष में भारी जनहानि भी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक ईरान में 1,900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजरायल में 18 लोगों की जान गई है। लेबनान में भी संघर्ष का असर देखा गया है, जहां 1,100 से अधिक लोगों की मौत की खबर है। इसके अलावा, वेस्ट बैंक और खाड़ी देशों में भी दर्जनों लोग इस हिंसा की चपेट में आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव जल्द नहीं थमा तो यह पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद शांति की संभावना कमजोर नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को कम करने में सफल हो पाता है या यह संघर्ष और भी गहराता है।

