Iran-US War: अमेरिकी युद्धपोत USS Gerald R. Ford पर हमले के दावे से बढ़ा विवाद, ट्रंप के बयान पर पेंटागन ने दी सफाई
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford पर भीषण हमला किया। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है, हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
ट्रंप का बड़ा दावा
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने 17 अलग-अलग दिशाओं से बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए USS Gerald R. Ford को निशाना बनाया। उनके मुताबिक, हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जहाज पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। उन्होंने इसे अमेरिकी नौसेना के लिए “बड़ा झटका” बताते हुए ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर चेतावनी भी दी।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं और क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
पेंटागन ने किया खंडन
हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, USS Gerald R. Ford पर किसी भी प्रकार का मिसाइल हमला नहीं हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाज पर लगी आग एक तकनीकी खराबी की वजह से हुई थी, न कि किसी सैन्य हमले के कारण।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज के लॉन्ड्री सेक्शन में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट या यांत्रिक गड़बड़ी के कारण आग लगी, जो करीब 30 घंटे तक जलती रही। इस दौरान 600 से अधिक नाविकों को अपने केबिन छोड़कर अस्थायी जगहों पर रहना पड़ा। दो नाविकों को मामूली चोटें आईं और कई लोगों को धुएं के कारण चिकित्सा सहायता लेनी पड़ी।
मरम्मत के लिए भेजा गया जहाज
घटना के बाद USS Gerald R. Ford को मरम्मत के लिए ग्रीस के क्रेटे स्थित सौदा बे नौसैनिक अड्डे पर भेज दिया गया है। यह जहाज पहले रेड सी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का अहम हिस्सा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से लगातार तैनाती, क्रू की थकान और रखरखाव संबंधी चुनौतियों के कारण जहाज की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन इसे एक “सामान्य तकनीकी समस्या” बता रहा है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। एक ओर ट्रंप के बयान से सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, वहीं पेंटागन की सफाई से यह स्पष्ट होता है कि स्थिति उतनी गंभीर नहीं थी जितना बताया गया।
क्या है रणनीतिक महत्व?
USS Gerald R. Ford अमेरिका के सबसे आधुनिक और महंगे युद्धपोतों में से एक है, जिसकी कीमत लगभग 13 बिलियन डॉलर बताई जाती है। ऐसे में इस जहाज का किसी भी कारण से युद्ध क्षेत्र से हटना अमेरिकी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि मौजूदा युद्ध में न केवल सैन्य मोर्चे पर दबाव है, बल्कि सूचनाओं और बयानों के स्तर पर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आने वाले समय में इस तरह के दावों और जवाबों का असर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

