Iran-US War: राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की चेतावनी—“हम पहले हमला नहीं करते, लेकिन जवाब होगा बेहद कड़ा”
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते टकराव के बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian का बड़ा बयान सामने आया है। जंग के एक महीने पूरे होने पर उन्होंने अपने विरोधियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान किसी भी हाल में पहले हमला नहीं करता, लेकिन यदि उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया गया, तो जवाब बेहद कड़ा और निर्णायक होगा।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक पोस्ट में कहा, “हम कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान आक्रामक नीति नहीं अपनाता। लेकिन अगर हमारे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक हितों पर हमला हुआ, तो हम पूरी ताकत से जवाब देंगे।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
उन्होंने मिडिल ईस्ट के अन्य देशों को भी सीधे तौर पर संदेश देते हुए कहा कि यदि वे अपनी सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के विरोधियों द्वारा सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं करने देना चाहिए। यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन देशों के लिए जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को Tehran पर हुए हमले के बाद से ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान लगातार मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहा है। इनमें Saudi Arabia, United Arab Emirates, Bahrain, Oman और Qatar जैसे देश शामिल हैं।
ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए किए जा रहे इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कई सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान और सैन्य गतिविधियां आने वाले समय में संघर्ष को और बढ़ा सकती हैं। मिडिल ईस्ट पहले से ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र रहा है, और यहां अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार पर इसका प्रभाव साफ देखा जा रहा है।
ईरान की इस आक्रामक चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं और बढ़ गई हैं। कई देश कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह टकराव और बढ़ता है या फिर वैश्विक दबाव के चलते इसमें कमी आती है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक संकट के केंद्र में खड़ा नजर आ रहा है, जहां हर बयान और हर कार्रवाई के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

