मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के तहत स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने का दावा किया गया है। हालांकि, क्षेत्रीय हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और कई मुद्दों पर अनिश्चितता बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के लेक ल्यूसर्न में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच करीब 18 घंटे तक मैराथन वार्ता हुई। इस बैठक के बाद दोनों पक्षों ने अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। इससे पहले 17 जून को दोनों देशों के बीच 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान की सहमति
इस बीच, ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने मस्कट में मुलाकात के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बिना शुल्क आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों नेताओं ने कहा कि हाल ही में हुए ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े प्रावधानों पर रचनात्मक चर्चा हुई है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।
लेबनान में जारी रहेगा इजरायली सैन्य अभियान
दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि इजरायली सैनिक फिलहाल लेबनान में बने रहेंगे। नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ और सेना प्रमुख एयाल ज़मीर ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए सैन्य उपस्थिति जारी रखी जाएगी।
हालांकि, इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर अभी भी बातचीत जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक स्थायी समझौता नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।
ट्रंप प्रशासन पर डेमोक्रेट्स का हमला
अमेरिका में भी ईरान नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति से जुड़े डेमोक्रेट सांसदों ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रगति से पहले ही तेहरान को प्रतिबंधों में राहत दे दी गई।
डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि प्रशासन के कदम उसकी पहले की सार्वजनिक घोषणाओं से मेल नहीं खाते। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन शर्तों को पूरा किए बिना प्रतिबंधों में ढील नहीं देने की बात कही गई थी, उन पर पर्याप्त प्रगति के बिना राहत क्यों दी गई।
गालिबाफ ने आलोचकों को दिया जवाब
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ ने स्विट्जरलैंड वार्ता की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि यदि ईरानी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए नहीं जाता, तो लेबनान में और अधिक रक्तपात हो सकता था। उन्होंने कहा कि वार्ता का उद्देश्य केवल कूटनीतिक समाधान तलाशना और क्षेत्रीय तनाव को कम करना था।
मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान और अमेरिका अगले 60 दिनों में किसी स्थायी समझौते तक पहुंच पाते हैं या नहीं।

