28 Mar 2026, Sat

Iran US War: ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड फोर्ड पर 17 एंगल से किया हमला, हम जान बचाकर भागे; ट्रंप का खुलासा

ईरान-अमेरिका युद्ध: USS Gerald R. Ford पर हमले के दावे से मचा विवाद, ट्रंप के बयान पर सवाल

मिडिल ईस्ट में जारी Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा और विवादास्पद दावा सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford पर भीषण हमला किया था, जिससे अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

ट्रंप के अनुसार, ईरान ने इस न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर पर 17 अलग-अलग दिशाओं से बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। उन्होंने दावा किया कि यह हमला इतना गंभीर था कि जहाज पर अफरा-तफरी मच गई और हालात बेहद खतरनाक हो गए थे। ट्रंप ने कहा, “अगर हम समय रहते नहीं निकलते, तो सब खत्म हो सकता था।” इस बयान ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है और ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया है। पेंटागन के मुताबिक, USS Gerald R. Ford पर किसी भी तरह का ईरानी हमला नहीं हुआ। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जहाज पर हाल ही में जो आग लगी थी, वह किसी मिसाइल हमले के कारण नहीं बल्कि तकनीकी खराबी या इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आग जहाज के एक हिस्से में लगी थी और लगभग 30 घंटे तक जलती रही। इस दौरान 600 से अधिक नाविकों को अपने रहने के स्थान छोड़ने पड़े और अस्थायी रूप से अन्य जगहों पर रहना पड़ा। घटना में दो नाविकों को मामूली चोटें आईं, जबकि कई अन्य को धुएं के कारण चिकित्सकीय सहायता लेनी पड़ी। हालांकि, पेंटागन ने इसे “नॉन-कॉम्बैट इवेंट” बताते हुए कहा कि जहाज अब भी पूरी तरह मिशन के लिए सक्षम है।

इसके बावजूद, इस घटना ने अमेरिकी नौसेना की तैयारियों और युद्धक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। USS Gerald R. Ford, जिसकी कीमत करीब 13 बिलियन डॉलर बताई जाती है, को फिलहाल मरम्मत के लिए ग्रीस के सौदा बे नौसैनिक अड्डे पर भेज दिया गया है। यह वही युद्धपोत है जो रेड सी में चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान का अहम हिस्सा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तैनाती, क्रू की थकान और रखरखाव संबंधी समस्याओं के कारण इस अत्याधुनिक युद्धपोत की क्षमता प्रभावित हुई हो सकती है। वहीं, विपक्षी नेताओं और कुछ अमेरिकी सांसदों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है और नौसेना की स्थिति पर चिंता जताई है।

दूसरी ओर, ट्रंप के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान युद्ध के माहौल में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत दिखाने या ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है।

कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि Iran और United States के बीच जारी संघर्ष सिर्फ जमीनी या हवाई हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना युद्ध और दावों-प्रतिदावों का भी अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में सच्चाई क्या है, यह जांच और आधिकारिक रिपोर्ट्स के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।

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