12 Apr 2026, Sun

Iran US War: अमेरिकी सैनिक ने बताई कुवैत में ईरानी हमले की डरावनी दास्तां, कहा-सबकुछ हिल गया, बिलकुल फिल्मों जैसा सीन था

Iran-US Conflict: कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी ड्रोन हमले का खुलासा, सैनिक ने बताया ‘फिल्म जैसा था मंजर’

नई दिल्ली: ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कुवैत में तैनात एक अमेरिकी सैनिक ने ईरानी ड्रोन हमलों का ऐसा भयावह अनुभव साझा किया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘सब कुछ हिल गया, फिल्मों जैसा था मंजर’

सैनिक के अनुसार, जब ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, तो पूरा इलाका हिल उठा।
उसने बताया, “कान सुन्न हो गए थे, चारों तरफ धूल और धुआं था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी युद्ध फिल्म का दृश्य सामने हो।”

हमले के दौरान सैनिकों में अफरा-तफरी मच गई और वे बिना किसी ठोस सुरक्षा के इधर-उधर भागने लगे।

ड्रोन हमलों से बचाव के इंतजाम नहीं

सैनिक ने सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई कि ड्रोन हमलों से बचने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।
उसने कहा कि हमले के दौरान सैनिकों को मजबूरन असुरक्षित इलाकों में जाना पड़ा, क्योंकि सुरक्षित शेल्टर या एंटी-ड्रोन सिस्टम उपलब्ध नहीं थे।

कुवैत में लगातार हुए हमले

कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे, खासकर अली अल-सेलेम एयर बेस, ईरानी हमलों का मुख्य निशाना बने।
बताया जा रहा है कि ड्रोन और मिसाइलों के जरिए कई बार हमले किए गए, जिनमें कई अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई और कई घायल हुए।

पहले से था खतरे का अंदेशा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी यूनिट को पहले से ही हमले की आशंका थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई।
सैनिक ने दावा किया कि उनकी यूनिट पूरी तरह से तैयार नहीं थी और उन्हें ऐसे इलाके में तैनात किया गया जहां सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर थे।

पेंटागन के दावों पर सवाल

सैनिक के बयान ने पेंटागन के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पेंटागन ने पहले कहा था कि ईरानी हमलों को काफी हद तक विफल कर दिया गया था, लेकिन सैनिक का कहना है कि यह दावा वास्तविकता से काफी दूर है।

हमले के बाद का मंजर

हमले के बाद सैनिकों को खुद ही घायलों की मदद करनी पड़ी। धुएं, मलबे और लगातार धमाकों के बीच उन्होंने अपने साथियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की।
पूरे इलाके में भय और अफरा-तफरी का माहौल था।

क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने युद्ध के स्वरूप को बदल दिया है और पारंपरिक रक्षा प्रणाली इसके सामने कमजोर साबित हो रही है।

निष्कर्ष

कुवैत में हुए इन हमलों का खुलासा यह दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन कितने खतरनाक और प्रभावी हो सकते हैं।
साथ ही यह भी साफ हो गया है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसे हमले भविष्य में और भी बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।

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