ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। Abbas Araghchi इस समय सक्रिय रूप से विभिन्न देशों के साथ संपर्क साध रहे हैं, खासकर तब जब इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिका की ओर से वार्ता में प्रतिनिधिमंडल न भेजे जाने के बाद बातचीत ठप पड़ गई, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं।
इस असफल वार्ता के बाद अराघची ने तेजी से अपने दौरे शुरू किए। वह पहले Oman पहुंचे, जहां उन्होंने वहां के सुल्तान से मुलाकात की। इसके बाद वह दोबारा Islamabad लौटे और फिर वहां से रूस रवाना हो गए। रविवार को वह Saint Petersburg पहुंचे, जहां सोमवार को उनकी मुलाकात Vladimir Putin से होने वाली है।
पुतिन से मुलाकात से पहले अराघची ने बयान देते हुए कहा कि यह बैठक “युद्ध के घटनाक्रम पर चर्चा करने का एक अच्छा अवसर” होगी। इससे संकेत मिलता है कि ईरान अब इस पूरे संकट को केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय समर्थन के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच ईरानी मीडिया ने एक बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Northrop F-5 लड़ाकू विमान ने अमेरिकी हवाई सुरक्षा को भेदते हुए कुवैत में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमला किया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
ईरान की रणनीति अब साफ नजर आ रही है—वह अपने सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत कर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ समर्थन जुटाने में लगा है। रूस, जो पहले से ही ईरान का एक प्रमुख रणनीतिक सहयोगी रहा है, इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा सकता है।
एक और प्रतीकात्मक कदम के तहत अराघची के विमान का नाम “#Minab168” रखा गया है। यह नाम तेहरान के मिनाब क्षेत्र में कथित हमले में मारे गए 168 बच्चों की याद में रखा गया है। ईरान इस घटना को अमेरिका और इजरायल की ओर से किया गया एक क्रूर हमला बताता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे उजागर करने की कोशिश कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता फिलहाल ठप है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय और वैश्विक ताकतें इस संकट में सक्रिय हो रही हैं। रूस के साथ होने वाली यह बैठक आगे की रणनीति तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात और संवेदनशील हो सकते हैं, खासकर यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं। हालांकि, अभी भी बातचीत और समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।

