12 Apr 2026, Sun

Iran-US Ceasefire: ‘सीजफायर की हो रही ऐसी तैसी’, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी जुबानी जंग

अमेरिका-ईरान सीजफायर पर संकट, कुछ ही घंटों में फिर बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर को लेकर स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई है। सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिससे इस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने इस मुद्दे पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ने लगातार समझौतों का उल्लंघन किया है, जिससे ईरान का उस पर भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ऐतिहासिक अविश्वास का कारण उसके बार-बार समझौतों को तोड़ना रहा है।

गालिबाफ ने 10 सूत्री प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसे बातचीत और शांति के लिए एक आधार माना गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रस्ताव के कई अहम बिंदुओं का उल्लंघन किया गया है। इनमें लेबनान में युद्धविराम से जुड़ी शर्तों का पालन न करना, ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन की घुसपैठ, और ईरान के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का उल्लंघन शामिल है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में वार्ता और सीजफायर दोनों ही कमजोर हो जाते हैं।

वहीं, अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि ईरान इस वार्ता को विफल करना चाहता है, तो यह उनका निर्णय होगा, लेकिन यह कदम उनके लिए गलत साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने किसी भी तरह के गलत कदम नहीं उठाए हैं और स्थिति को लेकर उसका रुख साफ है।

व्हाइट हाउस ने भी एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि अमेरिका ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। बयान में दावा किया गया कि ईरान की नौसैनिक क्षमता को नुकसान पहुंचाया गया है और उसकी रक्षा संरचना कमजोर हुई है। साथ ही यह भी कहा गया कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को भी रोका गया है और क्षेत्र में उसकी ताकत को काफी हद तक सीमित किया गया है।

इन घटनाओं के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर का भविष्य अनिश्चित है। दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद और एक-दूसरे पर अविश्वास इस समझौते को लंबे समय तक बनाए रखने में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

फिलहाल, भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं या स्थिति और अधिक बिगड़ती है।

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