मुंबई/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच नई ट्रेड डील की घोषणा के बाद अदानी ग्रुप के शेयरों में तेजी देखने को मिली। इस डील के तहत अमेरिकी सरकार ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इस घोषणा के बाद अदानी पावर, अदानी पोर्ट्स एंड SEZ, अदानी एंटरप्राइजेज और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी हुई।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदानी ग्रुप को उन कंपनियों में शामिल किया है, जिन्हें अमेरिकी टैरिफ में कमी से सबसे ज्यादा लाभ होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि पोर्ट्स, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कारोबारों को इस डील से मजबूती मिलेगी।
शेयर बाजार में प्रभाव
बाजार में ट्रेड डील की खबर आने के बाद अदानी पावर के शेयरों में 8%, अदानी ग्रीन एनर्जी 4%, जबकि अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अदानी टोटल गैस के शेयरों में 2% से अधिक की तेजी देखी गई। अदानी पोर्ट्स का शेयर 1.6% की बढ़त के साथ 52 हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान एनडीटीवी के शेयरों में भी करीब 10% की उछाल दर्ज की गई।
अदानी ग्रुप की सभी सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर 14 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। ट्रेड डील की खबर से न केवल अदानी समूह बल्कि पूरे शेयर बाजार की धारणा भी बेहतर हुई है।
डिफेंस सेक्टर में अदानी का बड़ा कदम
अदानी ग्रुप ने डिफेंस सेक्टर में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए इटली की कंपनी लियोनार्डो के साथ साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत भारत में एकीकृत हेलिकॉप्टर निर्माण इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह कदम पहले हुए समझौते के बाद आया, जिसमें अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने ब्राजील की कंपनी एंब्रेयर के साथ भारत में क्षेत्रीय विमान निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए रणनीतिक सहयोग किया था।
इस साझेदारी के तहत भारतीय सशस्त्र बलों के लिए AW169M और AW109 ट्रेकरM हेलिकॉप्टर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि यह सहयोग चरणबद्ध स्वदेशीकरण, MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) क्षमताओं और पायलट ट्रेनिंग को सुनिश्चित करेगा। रिपोर्ट के अनुसार भारत का हेलिकॉप्टर बाजार 2024 में 1.58 अरब डॉलर से बढ़कर 2032 तक 2.88 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
निष्कर्ष
भारत-अमेरिका ट्रेड डील ने न केवल अदानी ग्रुप के शेयरों में मजबूती लाई है बल्कि पोर्ट्स, एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर में निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस डील से भारत के निर्यात और विदेशी निवेश को भी मजबूती मिलेगी।

