31 Mar 2026, Tue

Income Tax: AY 2026–27 के लिए जारी हुआ ITR फॉर्म, अपडेटेड ITR-U और ITR-V फॉर्म भी जारी

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026–27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही विभाग ने ITR-U (अपडेटेड ITR) और ITR-V (वेरिफिकेशन फॉर्म) में भी कुछ अहम बदलाव किए हैं। ये बदलाव टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।

नए नियमों के अनुसार, ITR-V फॉर्म 31 मार्च 2026 से लागू होगा और यह उन सभी टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी होगा जो AY 2026–27 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं। वहीं, 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने जा रहा है, जो पुराने Income Tax Act 1961 की जगह लेगा। यह बदलाव देश की टैक्स व्यवस्था में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

ITR-U को पहली बार 2022 में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स को अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर देना था। इस फॉर्म के जरिए करदाता अपना छूटा हुआ रिटर्न फाइल कर सकते हैं, पहले की गई गलतियों को सुधार सकते हैं या ऐसी इनकम जोड़ सकते हैं जिसकी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। यह सुविधा उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो समय पर सही जानकारी जमा नहीं कर पाते।

बजट 2025 के अनुसार, सेक्शन 139(8A) के तहत ITR-U फाइल करने की समय सीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। अब टैक्सपेयर्स संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने के बाद 4 साल तक अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं, जबकि पहले यह समय सीमा केवल 2 साल थी। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2020–21 (AY 2021–22) का अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च 2026 तक फाइल किया जा सकता है।

हालांकि, ITR-U का इस्तेमाल करने पर टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करना होता है। यह अतिरिक्त टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि रिटर्न कब फाइल किया जा रहा है। पहले साल में 25%, दूसरे साल में 50%, तीसरे साल में 60% और चौथे साल में 70% अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है। इस प्रावधान का उद्देश्य टैक्सपेयर्स को समय पर सही जानकारी देने के लिए प्रेरित करना है।

ITR-V एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसे इनकम टैक्स रिटर्न का प्रूफ माना जाता है। यह फॉर्म इस बात की पुष्टि करता है कि आपका रिटर्न सफलतापूर्वक फाइल हो गया है। टैक्सपेयर्स को ITR-V को ई-वेरिफाई या फिजिकल रूप से जमा करना होता है। इसकी समय सीमा रिटर्न फाइल करने की तारीख से 30 दिन तय की गई है।

यदि कोई टैक्सपेयर ITR-V को 30 दिनों के भीतर जमा कर देता है, तो उसकी रिटर्न फाइलिंग की तारीख को ही अंतिम माना जाता है। लेकिन अगर समय पर वेरिफिकेशन नहीं किया जाता, तो रिटर्न को अमान्य माना जा सकता है, जिससे टैक्सपेयर्स को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इन बदलावों के जरिए आयकर विभाग का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और पारदर्शी बनाना और टैक्सपेयर्स को अधिक सुविधा प्रदान करना है। डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देकर सरकार टैक्स फाइलिंग को तेज, आसान और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, AY 2026–27 के लिए जारी नए ITR फॉर्म और अपडेटेड नियम टैक्सपेयर्स के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आए हैं। यह जरूरी है कि हर टैक्सपेयर इन नियमों को ध्यान से समझे और समय पर अपनी फाइलिंग पूरी करे, ताकि किसी भी तरह की पेनल्टी या परेशानी से बचा जा सके।

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