21 Feb 2026, Sat

IMF चीफ ने AI को ‘सुनामी’ बताया, कहा- 40% नौकरियों पर आ सकता है खतरा, जानें और क्या कहा?

AI बनेगा ग्रोथ इंजन, लेकिन रोजगार पर ‘त्सुनामी’ का खतरा: IMF प्रमुख की चेतावनी

नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित India AI Impact Summit में Kristalina Georgieva ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए “दोधारी तलवार” करार दिया। उन्होंने कहा कि AI वैश्विक GDP वृद्धि को सालाना 0.8 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है, जिससे दुनिया कोविड-पूर्व स्तर से भी तेज आर्थिक रफ्तार हासिल कर सकती है। हालांकि, इसके साथ आने वाले रोजगार बदलावों को संभालने के लिए मजबूत नीतियां, स्किल डेवलपमेंट और शिक्षा सुधार बेहद जरूरी होंगे।

भारत के लिए सुनहरा अवसर

IMF प्रमुख ने भारत को लेकर खास भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार की क्षमता AI को लोकतांत्रिक बनाने में मददगार साबित हो सकती है। भारत ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है। जॉर्जीवा के मुताबिक, AI इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर भारत AI का सही उपयोग करता है, तो यह उत्पादकता, उद्यमिता और रोजगार सृजन के नए रास्ते खोल सकता है। खासकर स्टार्टअप इकोसिस्टम और टेक सेक्टर को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।

रोजगार बाजार पर बड़ा असर

उत्साहजनक संभावनाओं के साथ जॉर्जीवा ने गंभीर चेतावनी भी दी। IMF के शोध के अनुसार, AI वैश्विक स्तर पर करीब 40% नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह असर 60% तक और उभरते बाजारों में करीब 40% तक हो सकता है।

उन्होंने AI के प्रभाव को “लेबर मार्केट पर त्सुनामी” जैसा बताया—तेज, शक्तिशाली और अनदेखा न किया जा सकने वाला। एंट्री-लेवल नौकरियां और शुरुआती करियर भूमिकाएं सबसे ज्यादा जोखिम में होंगी। कुछ नौकरियां खत्म हो सकती हैं, कुछ का स्वरूप बदल जाएगा और कुछ अधिक कुशल एवं उच्च वेतन वाली बन सकती हैं।

अगर सरकारें समय रहते नीतिगत हस्तक्षेप नहीं करतीं, तो असमानता बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

नंदन नीलेकणि का दृष्टिकोण

इस बीच, Infosys के चेयरमैन Nandan Nilekani ने ‘Infosys Investor AI Day 2026’ में कहा कि AI क्रांति केवल कोडिंग तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में AI सिस्टम को संचालित करने, ऑर्केस्ट्रेट करने और बिजनेस प्रक्रियाओं में प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता ज्यादा अहम होगी।

नीलेकणि ने AI को स्मार्टफोन और क्लाउड क्रांति से भी ज्यादा बुनियादी बदलाव बताया। उनके मुताबिक, AI वैश्विक स्तर पर 170 मिलियन नए हाई-ग्रोथ जॉब्स पैदा कर सकता है—जैसे AI इंजीनियर्स, फॉरेंसिक एनालिस्ट्स, AI लीड्स और फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स। हालांकि बेसिक कोडिंग और QA टेस्टिंग जैसी कुछ पारंपरिक भूमिकाएं कम प्रासंगिक हो सकती हैं।

संतुलित रणनीति की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि AI से अधिकतम लाभ उठाने के लिए देशों को शिक्षा प्रणाली में सुधार, डिजिटल स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग कार्यक्रमों को प्राथमिकता देनी होगी।

भारत जैसी युवा-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह चुनौती के साथ-साथ ऐतिहासिक अवसर भी है। सही रणनीति अपनाकर AI को विकास, नवाचार और समावेशी वृद्धि का मजबूत इंजन बनाया जा सकता है।

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