5 Jun 2026, Fri

Gullak Season 5 Review: चेहरे बदलने से नहीं बदलते घर के रिश्ते, नए ‘अन्नू भैया’ के साथ कम नहीं हुई मिश्रा परिवार की मिठास

ओटीटी की दुनिया में जहां एक तरफ थ्रिलर, क्राइम, मर्डर मिस्ट्री और बड़े बजट की वेब सीरीज दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं, वहीं कुछ कहानियां ऐसी भी हैं जो बिना शोर-शराबे के सीधे दिल में उतर जाती हैं। ऐसी ही एक सीरीज है ‘गुल्लक’, जिसने अपनी सादगी, भावनाओं और मिडिल क्लास परिवार की सच्ची झलक के दम पर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है। अब इसका बहुप्रतीक्षित पांचवां सीजन रिलीज हो चुका है और एक बार फिर मिश्रा परिवार दर्शकों के बीच लौट आया है।

सोनी लिव पर स्ट्रीम हो रहा ‘गुल्लक सीजन 5’ अपने पुराने अंदाज को बरकरार रखते हुए नई परिस्थितियों और बदलते समय की कहानियां लेकर आया है। पिछले चार सीजन की सफलता के बाद दर्शकों की उम्मीदें इस बार भी काफी ऊंची थीं और यह सीजन उन उम्मीदों पर काफी हद तक खरा उतरता दिखाई देता है।

इस बार कहानी मिश्रा निवास 534 में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों के इर्द-गिर्द घूमती है। घर में वर्षों बाद पुताई हो रही है, दीवारों पर नया रंग चढ़ रहा है और पहली बार वाई-फाई राउटर की एंट्री हुई है। बड़े बेटे अन्नू की ऑनलाइन मीटिंग्स और आधुनिक जरूरतों के कारण घर में तकनीक का प्रवेश दिखाया गया है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन बदलावों के बीच भी घर की पुरानी परंपराएं और भावनाएं जस की तस बनी हुई हैं।

सीजन की सबसे खास बात यह है कि यहां कोई बड़ा सस्पेंस या चौंकाने वाला ट्विस्ट नहीं है। कहानी रोजमर्रा की जिंदगी के उन छोटे-छोटे पलों से बुनी गई है, जिनसे लगभग हर भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार जुड़ाव महसूस कर सकता है। पिता संतोष मिश्रा घर के रेनोवेशन के लिए लोन लेने की चिंता में हैं, लेकिन अपने आत्मसम्मान के कारण बेटे से आर्थिक मदद मांगने से बचते हैं। वहीं मां शांति मिश्रा अपने अस्तित्व और पहचान को लेकर मानसिक संघर्ष से गुजर रही हैं।

छोटा बेटा अमन हॉस्टल से लौट चुका है और अपने साथ कुछ नए अनुभव और एक छोटा सा राज भी लेकर आया है। दूसरी ओर अन्नू अपने करियर, ऑफिस के दबाव और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच फंसा हुआ है। साथ ही डॉक्टर प्रीति के लिए उसके मन में छिपी भावनाएं भी धीरे-धीरे कहानी में नया रंग भरती हैं।

पड़ोस की बिट्टू की मम्मी इस बार भी अपने चिर-परिचित अंदाज में माहौल को हल्का और मनोरंजक बनाती नजर आती हैं। उनकी मौजूदगी कई दृश्यों में हास्य का तड़का लगाती है। पनीर के टुकड़ों का गायब होना, दांत का दर्द, घरेलू बहसें और पारिवारिक उलझनें जैसे मामूली लगने वाले मुद्दे ही इस सीजन की असली ताकत हैं।

निर्देशन और लेखन की बात करें तो TVF ने एक बार फिर साबित किया है कि मजबूत कहानी और भावनात्मक जुड़ाव के लिए बड़े सेट या भारी-भरकम ड्रामा की जरूरत नहीं होती। कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है, जिससे दर्शक खुद को मिश्रा परिवार का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।

कुल मिलाकर ‘गुल्लक सीजन 5’ एक ऐसी सीरीज है जो मनोरंजन के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव भी देती है। यह हमें याद दिलाती है कि जिंदगी की असली खुशियां बड़ी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए छोटे-छोटे पलों में छिपी होती हैं। अगर आपको सादगी, रिश्तों की गर्माहट और मिडिल क्लास जिंदगी की खूबसूरती पसंद है, तो यह सीजन आपके लिए जरूर देखने लायक है।

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