Explainer: ईरान–अमेरिका सीजफायर के बीच इजरायल के हमलों से बढ़ा तनाव, लेबनान बना नया विवाद का केंद्र
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच घोषित सीजफायर अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस समझौते के बीच इजरायल द्वारा लेबनान पर लगातार किए जा रहे हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जहां एक ओर Iran इस समझौते को व्यापक और क्षेत्रीय मान रहा है, वहीं United States की ओर से अलग रुख सामने आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में बयान दिया कि इस सीजफायर समझौते में लेबनान को शामिल नहीं किया गया है। उनका यह बयान उनके पहले के रुख से अलग माना जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अपने पिछले वादे से पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
दूसरी ओर, Iran का कहना है कि यह सीजफायर समझौता क्षेत्रीय स्तर पर लागू होना चाहिए और इसमें लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए। ईरान का यह रुख उसके समर्थित संगठन Hezbollah को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से इजरायल के साथ संघर्ष में शामिल रहा है।
इसी बीच, इजरायल की सेना Israel Defense Forces (IDF) द्वारा लेबनान में हमले जारी हैं। इन हमलों को इजरायल अपनी सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के रूप में देखता है। हालांकि, इन हमलों ने सीजफायर की शर्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सीजफायर के दायरे को लेकर सभी पक्ष एकमत नहीं होते, तब तक शांति की संभावनाएं कमजोर बनी रहेंगी। इजरायल-लेबनान सीमा पर बढ़ती हिंसा इस बात का संकेत है कि संघर्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
सीजफायर में कहां फंसा पेंच?
मूल विवाद इस बात को लेकर है कि क्या लेबनान और वहां सक्रिय हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को इस सीजफायर समझौते का हिस्सा माना जाए या नहीं। अमेरिका का कहना है कि समझौता मुख्य रूप से ईरान से संबंधित है, जबकि ईरान इसे व्यापक क्षेत्रीय समझौता मानता है। इस मतभेद के कारण दोनों देशों के बीच समझौते की व्याख्या अलग-अलग हो रही है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
लेबनान में जारी इजरायली हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पहले से ही इजरायल और Lebanon के बीच तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, और हिजबुल्लाह की मौजूदगी इसे और जटिल बनाती है। यदि हालात नियंत्रण से बाहर होते हैं, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप भी ले सकता है।
निष्कर्ष
ईरान–अमेरिका सीजफायर को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना कितना जटिल और चुनौतीपूर्ण है। इजरायल के हमले, ईरान और अमेरिका के अलग-अलग रुख, और लेबनान का मुद्दा—इन सभी ने मिलकर स्थिति को उलझा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सभी पक्ष किसी साझा समाधान पर पहुंच पाते हैं या यह तनाव और बढ़ता है।

