राज्यसभा चुनाव 2026: NDA की बड़ी बढ़त, विपक्ष को झटका; सदन में बदला समीकरण
देश के ऊपरी सदन राज्यसभा के लिए हुए चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं और इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। 16 मार्च को हुए इन चुनावों में NDA ने कुल 37 सीटों में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन को अपेक्षाकृत कम सफलता मिली।
इन चुनावों के बाद राज्यसभा में NDA की कुल संख्या बढ़कर 141 हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े 123 से काफी ज्यादा है। वहीं I.N.D.I.A. गठबंधन के पास अब 74 सदस्य ही रह गए हैं। इससे साफ है कि उच्च सदन में NDA की पकड़ पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है।
राज्यसभा चुनाव हर दो साल में आयोजित किए जाते हैं और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह साल का होता है। इस बार चुनाव 10 राज्यों—महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना—में हुए। कुल 37 सीटों में से 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए, जबकि 11 सीटों पर मुकाबला हुआ।
जिन सीटों पर मुकाबला हुआ, उनमें NDA का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। खासकर बिहार में NDA ने सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को पूरी तरह साफ कर दिया। वहीं ओडिशा में भी NDA ने 3 सीटों पर कब्जा जमाया, जिसमें एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन भी शामिल रहा। हरियाणा में मुकाबला कड़ा रहा, जहां NDA और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली।
निर्विरोध चुनी गई 26 सीटों में भी NDA का दबदबा देखने को मिला। इन सीटों में NDA को 13 सीटें मिलीं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 7 सीटें जीतीं। इसके अलावा सहयोगी दलों—शिवसेना (शिंदे गुट), NCP, AIADMK, PMK, RPI(A) और UPPL—ने भी जीत हासिल कर गठबंधन को मजबूती दी।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र, असम और बिहार जैसे राज्यों में NDA का प्रदर्शन खासा मजबूत रहा। वहीं पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों और विपक्षी गठबंधन का दबदबा कायम रहा।
इन चुनावों का सबसे बड़ा असर राज्यसभा की कुल संरचना पर पड़ा है। अब सदन में NDA के 141 सदस्य हैं, जिनमें 106 सांसद अकेले बीजेपी के हैं। दूसरी ओर I.N.D.I.A. गठबंधन के 74 सदस्यों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK और समाजवादी पार्टी जैसे दल शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नतीजों से केंद्र सरकार को विधायी कार्यों में और आसानी होगी, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के करीब या उससे ऊपर होना किसी भी बिल को पास कराने में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही, यह परिणाम आगामी राजनीतिक रणनीतियों और चुनावों के लिए भी संकेत देता है।
कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव 2026 ने देश की राजनीति में एक बार फिर NDA की मजबूती को स्थापित किया है, जबकि विपक्ष के लिए यह आत्ममंथन का समय है।

