ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कासेम सुलेमानी पर ट्रंप का बयान, जानिए कौन थे ‘शैडो कमांडर’
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के पूर्व सैन्य कमांडर कासेम सुलेमानी को लेकर बड़ा बयान दिया है। अपने हालिया संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अपने पहले कार्यकाल में सुलेमानी को मारना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि यदि सुलेमानी जिंदा रहते तो आज ईरान परमाणु हथियार हासिल कर चुका होता। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर सुलेमानी और उनकी भूमिका चर्चा में आ गई है।
कासेम सुलेमानी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के प्रमुख थे। उन्हें ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय रणनीति का मुख्य चेहरा माना जाता था। ईरान में उन्हें राष्ट्रीय नायक का दर्जा प्राप्त था, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नजर में वे एक खतरनाक सैन्य रणनीतिकार और “आतंक का आर्किटेक्ट” थे।
1957 में ईरान के केरमान प्रांत में जन्मे सुलेमानी ने साधारण जीवन से शुरुआत की थी। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे IRGC में शामिल हुए और 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने तेजी से तरक्की करते हुए 1998 में कुद्स फोर्स की कमान संभाली। इस भूमिका में उन्होंने मध्य-पूर्व में ईरान के प्रभाव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
सुलेमानी के नेतृत्व में ईरान ने कई प्रॉक्सी समूहों को समर्थन दिया, जिनमें लेबनान का हिजबुल्लाह, इराक की शिया मिलिशिया, सीरिया में बशर अल-असद की सरकार और यमन के हूती विद्रोही शामिल हैं। उन्हें असिमेट्रिक वॉरफेयर का मास्टर माना जाता था, यानी वे सीधे युद्ध के बजाय अप्रत्यक्ष तरीकों से दुश्मनों को कमजोर करने में माहिर थे।
अमेरिका का आरोप था कि सुलेमानी ने इराक और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी सैनिकों पर हमलों की साजिश रची, जिसमें सैकड़ों सैनिकों की जान गई। इसी कारण अमेरिका ने उन्हें आतंकवादी घोषित किया था। 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी को मार गिराया गया। इस हमले का आदेश तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था।
इस कार्रवाई को अमेरिका ने “सटीक और जरूरी” बताया, जबकि ईरान ने इसे “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” करार दिया। सुलेमानी की मौत के बाद ईरान में भारी विरोध प्रदर्शन हुए और उन्हें शहीद घोषित किया गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इराक स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले भी किए थे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सुलेमानी की हत्या ने मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन को प्रभावित किया और अमेरिका-ईरान संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। आज भी उनका नाम क्षेत्रीय राजनीति और सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में लिया जाता है।
ट्रंप के हालिया बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुलेमानी की मौत ने वाकई क्षेत्र में स्थिरता लाई या इससे तनाव और बढ़ा। मौजूदा हालात को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले समय में भी वैश्विक राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।

