3 Mar 2026, Tue

Explainer: इजरायल ने खामेनेई की लोकेशन कैसे पता की? सालों पहले बन चुकी थी रणनीति

ईरान में बड़ा घटनाक्रम: खामेनेई की मौत के बाद इजरायल की कथित साइबर साजिश का खुलासा

यरूशलेम/वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। इसी बीच एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इजरायल ने कथित तौर पर वर्षों तक ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी।

लंदन स्थित अखबार Financial Times की रिपोर्ट के हवाले से खबर सामने आई है कि इजरायली खुफिया एजेंसियों ने एक लंबी रणनीति के तहत तेहरान के ट्रैफिक कैमरों और मोबाइल नेटवर्क में सेंध लगाई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राजधानी तेहरान के लगभग सभी प्रमुख ट्रैफिक कैमरों की फुटेज को एन्क्रिप्ट कर सर्वरों पर भेजा जाता था, जिससे ईरानी नेतृत्व की लोकेशन और मूवमेंट का सटीक विश्लेषण किया जा सके।

बताया जा रहा है कि इसी डिजिटल निगरानी के आधार पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन अगर यह सच है तो यह आधुनिक साइबर युद्ध का एक बड़ा उदाहरण माना जाएगा।

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में Fox News को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि ईरान का इस्लामी शासन दशकों से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान ने दुनिया भर में आतंक का जाल फैलाया और अमेरिका को निशाना बनाने की कोशिश की।

वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और उपराष्ट्रपति JD Vance का भी बयान सामने आया है। जेडी वैंस ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता था कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनके अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

अगर ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग की बात सही साबित होती है, तो यह साइबर सुरक्षा और संप्रभुता के सवालों को लेकर वैश्विक बहस छेड़ सकती है। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे के उठने की संभावना है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है।

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