24 Feb 2026, Tue

Chandra Grahan: चंद्रग्रहण के दिन गलती से भी न छुएं 4 चीजें, सक्रिय हो जाएगी नकारात्मक ऊर्जा

3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्रग्रहण, जानें किन चीजों को छूने से बचें

साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण का समय संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा के सक्रिय होने की मान्यता है, इसलिए कई परंपराओं में कुछ खास नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से कुछ वस्तुओं और पवित्र प्रतीकों को छूने से बचने की बात कही जाती है, ताकि जीवन पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े। आइए जानते हैं किन चीजों से दूरी बनाए रखना शुभ माना गया है।

1. तुलसी का पौधा

हिंदू धर्म में Tulsi (तुलसी) को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रग्रहण के दौरान तुलसी के पौधे को छूना या उससे पत्ते तोड़ना वर्जित होता है। अगर ग्रहण के बाद किसी भोजन या प्रसाद में तुलसी दल का उपयोग करना हो तो पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर सुरक्षित रख लेने चाहिए। माना जाता है कि ग्रहण काल में तुलसी को छूने से नकारात्मकता का प्रभाव जीवन पर पड़ सकता है।

2. नुकीली वस्तुएं

चंद्रग्रहण के समय चाकू, छुरी, कैंची, सुई जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान इन वस्तुओं को छूना या इस्तेमाल करना अशुभ माना जाता है। कई घरों में ग्रहण काल में रसोई का काम भी रोक दिया जाता है और पहले से बना भोजन ही ग्रहण के बाद सेवन किया जाता है।

3. पीपल और बरगद का पेड़

धार्मिक दृष्टि से Peepal (पीपल) और Banyan (बरगद) के वृक्षों को देववृक्ष माना जाता है। ग्रहण के दिन इन पेड़ों को छूने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि श्रद्धालु दूर से दर्शन कर सकते हैं, लेकिन स्पर्श करना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है।

4. देवी-देवताओं की मूर्तियां

चंद्रग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों पर अस्थायी विराम लगाने की परंपरा है। इस समय घर के मंदिर को लाल या पीले कपड़े से ढककर रखने की सलाह दी जाती है। देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूना या पूजा करना ग्रहण काल में उचित नहीं माना जाता। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर और घर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया जाता है, फिर नियमित पूजा शुरू की जाती है।

क्या करें और क्या न करें?

ग्रहण के दौरान मंत्र जाप, ध्यान और भजन करना शुभ माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। वहीं ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना और दान-पुण्य करना भी शुभ माना गया है।

ध्यान रहे कि ये सभी बातें धार्मिक आस्थाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है।

आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन बनाते हुए, जो लोग परंपराओं में विश्वास रखते हैं, वे इन नियमों का पालन कर सकते हैं।

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