Budget 2026: बढ़ता रक्षा बजट क्या भारत को बनाएगा आत्मनिर्भर और वैश्विक शक्ति? जानिए एक्सपर्ट्स की राय
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश करने जा रही हैं और इस बार बजट में रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी बजट यह स्पष्ट संकेत देगा कि भारत का लगातार बढ़ता रक्षा व्यय किस तरह आत्मनिर्भर भारत, सैन्य आधुनिकीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की भूमिका को मजबूत कर सकता है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सीमा सुरक्षा और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के चलते रक्षा खर्च सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है।
पांच साल में 2 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत के रक्षा व्यय में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2020-21 में जहां रक्षा बजट 4.85 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 (संशोधित अनुमान) में यह बढ़कर 6.41 लाख करोड़ रुपये हो गया। आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में रक्षा खर्च को 6.81 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। यानी पांच वर्षों में रक्षा बजट में करीब 2 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी सीमा पर बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच सरकार की रणनीतिक सोच को दर्शाती है।
आधुनिकीकरण और पूंजीगत व्यय पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा बजट में सिर्फ राशि बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उसके सही इस्तेमाल पर भी सरकार का जोर बढ़ा है। बजट 2025-26 के अनुमान के मुताबिक, कुल रक्षा व्यय का लगभग 26% यानी 1.80 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए तय किया गया है। इसका बड़ा हिस्सा सेना के आधुनिकीकरण और घरेलू रक्षा खरीद पर खर्च किया जाएगा। उद्योग संगठन FICCI का कहना है कि इस पूंजीगत हिस्से को बढ़ाकर कुल रक्षा बजट का करीब 30% किया जाना चाहिए, ताकि देश में रक्षा उत्पादन को और मजबूती मिल सके।
टेक्नोलॉजी और R&D को मिल सकता है बढ़ावा
Budget 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार रक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और अत्याधुनिक तकनीकों पर फोकस करेगी। FICCI ने सरकार से DRDO के लिए 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और UAVs, साइबर सिक्योरिटी तथा अंतरिक्ष क्षमताओं के विकास के लिए अधिक बजट आवंटन की संभावना जताई जा रही है। यह कदम भारत को भविष्य की युद्ध तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकता है।
रक्षा निर्यात से भारत की बढ़ती ताकत
भारत के रक्षा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि उसका तेजी से बढ़ता रक्षा निर्यात है। आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 से 2023-24 के बीच भारत का रक्षा निर्यात 46% की सालाना दर से बढ़ा है, जिसमें निजी कंपनियों की भूमिका अहम रही है। सरकार ने 2028-29 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि Budget 2026 में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत समर्थन और प्रोत्साहन की घोषणा हो सकती है।
क्या बनेगा बजट गेमचेंजर?
कुल मिलाकर, Budget 2026 भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। अगर सरकार पूंजीगत व्यय, तकनीक, R&D और निर्यात पर संतुलित फोकस रखती है, तो भारत न सिर्फ सैन्य रूप से मजबूत होगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।

